एफआईआर के मुताबिक, हरियाणा निवासी ओमप्रकाश मुख्य आरोपी का सहयोगी था। उसने युवक को आश्वासन दिया था कि 43 लाख रुपये का भुगतान करने पर उसे वैध तरीके से अमेरिका भेज दिया जाएगा। युवक के पिता ने अपनी गवाही में बताया कि ओमप्रकाश ने उनसे 22 लाख रुपये की ठगी की। ओमप्रकाश ने मुख्य आरोपी की मदद करते हुए शिकायतकर्ता को सितंबर 2024 में दुबई भेजा। वहां से उसे पनामा के खतरनाक जंगलों के रास्ते मैक्सिको तक पहुंचाया गया।
एक फरवरी 2025 को एजेंटों ने युवक को अमेरिकी सीमा पार कराई, लेकिन सीमा पर उसे अमेरिकी पुलिस ने पकड़ लिया। युवक को जेल भेज दिया गया और 16 फरवरी 2025 को उसे भारत वापस भेज दिया गया।
पीड़ित के परिवार ने आरोप लगाया कि आरोपी ने पहले भी ऐसे मामलों में लोगों को ठगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला केवल आर्थिक धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मानवाधिकारों का उल्लंघन भी शामिल है। पीठ ने कहा कि ऐसे लोग न केवल देश की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि निर्दोष लोगों को असुरक्षित और अमानवीय परिस्थितियों में डाल रहे हैं।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पहले ही ओमप्रकाश की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उच्च न्यायालय ने कहा था कि आरोपी ने पीड़ित और उसके परिवार को गुमराह किया और उनके साथ धोखाधड़ी की। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि ऐसे गंभीर मामलों में किसी भी आरोपी को राहत देना गलत होगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि डंकी रूट जैसी अवैध गतिविधियों को खत्म करने के लिए कड़ी सजा और सतर्कता जरूरी है।





