वडाला ने यह भी कहा कि जल्दी ही वे सदस्यता अभियान शुरू करेंगे, ताकि नए दल का आधार मजबूत किया जा सके। उनका आरोप है कि शिरोमणि अकाली दल का नेतृत्व अपनी राजनीति में मनमानी कर रहा है और उनकी पार्टी का हर कदम सरकार की ओर से नियंत्रित किया जा रहा है। वडाला का कहना था कि जब अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह और एसजीपीसी के प्रमुख हरजिंदर सिंह धामी के साथ उनकी बैठक हुई थी, तब दोनों ने सहमति जताई थी कि अकाल तख्त द्वारा बनाई गई कमेटी ही पार्टी का सदस्यता अभियान चलाएगी और दल को पुनः मजबूत किया जाएगा, लेकिन समय बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
वडाला ने सवाल उठाया कि आखिरकार अकाल तख्त और एसजीपीसी के प्रमुख इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं। उनका कहना था, "हमने सुधार लहर के तहत अकाली दल को एकजुट करने की कोशिश की थी, लेकिन अकाली दल के नेतृत्व ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि अकाल तख्त के आदेश पर "अकाली दल सुधार लहर" को बंद कर दिया गया था, ताकि एकजुटता की दिशा में काम हो सके, लेकिन न तो पार्टी के शीर्ष नेता इस पर ध्यान दे रहे हैं और न ही कोई दिशा-निर्देश आ रहे हैं।
वडाला ने यह स्पष्ट किया कि अगर वर्तमान स्थिति में बदलाव नहीं आता, तो वे नई पार्टी का गठन करेंगे, जो अकाल तख्त के दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस नई पार्टी का मुख्य उद्देश्य अकाली विचारधारा का समर्थन करना और पंजाब की राजनीति में सुधार लाना होगा। हालांकि, वडाला ने यह स्पष्ट किया कि उनका निर्णय अकाल तख्त के आदेशों के अनुसार ही लिया जाएगा, और वे इसके बारे में जल्द ही एक बैठक आयोजित करेंगे, जिसमें आगामी कदमों पर विचार किया जाएगा।
पंजाब की राजनीति में इस समय कई दलों और समूहों के बीच संघर्ष और असहमति चल रही है। इससे पहले अमृतपाल सिंह ने वारिस पंजाब दे अकाली दल की स्थापना की थी, जो कि खालिस्तान समर्थक आंदोलन को बढ़ावा देने का प्रयास करता है। इसके अलावा, सिमरनजीत सिंह मान द्वारा बनाई गई अकाली दल (अमृतसर) पार्टी भी राज्य में अकाली विचारधारा का समर्थन करने का दावा करती है। इस प्रकार, अगर वडाला और उनके समर्थकों द्वारा एक नई पार्टी गठित की जाती है, तो पंजाब में अकाली राजनीति को लेकर एक और विभाजन होगा।
इससे राज्य में अकाली राजनीति की दिशा बदल सकती है, क्योंकि इन पार्टियों के बीच सत्ता संघर्ष और राजनीतिक असहमति लगातार बढ़ रही है। वडाला और उनके समर्थकों की नई पार्टी का गठन राज्य में चार प्रमुख अकाली दलों के अस्तित्व को सुनिश्चित करेगा, जिनमें वारिस पंजाब दे अकाली दल, अकाली दल (अमृतसर), शिरोमणि अकाली दल और वडाला का नया दल शामिल होंगे। इससे न केवल अकाली दल के भीतर सत्ता संघर्ष और बढ़ेगा, बल्कि राज्य की राजनीति में भी एक नई दिशा की संभावना बन सकती है।
यह स्थिति पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भी असमंजस का कारण बन सकती है, क्योंकि वे यह नहीं समझ पा रहे हैं कि किस दल को समर्थन दिया जाए। यह पार्टी राजनीति के स्तर पर भी एक बड़ी चुनौती बन सकती है, क्योंकि इसके परिणाम स्वरूप पंजाब में अकाली राजनीति में और अधिक विभाजन और संघर्ष हो सकता है। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि अकाल तख्त इस पूरे घटनाक्रम पर किस तरह की प्रतिक्रिया देता है, क्योंकि उसकी भूमिका राज्य की सिख राजनीति में केंद्रीय और निर्णायक रही है।





