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कपिल मिश्रा को हाईकोर्ट से झटका: भड़काऊ टिप्पणी मामले में ट्रायल पर रोक से इनकार

दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा को दिल्ली हाईकोर्ट से एक बड़ा और अप्रत्याशित झटका लगा है। हाईकोर्ट ने 2020 के विधानसभा चुनाव से पहले उनके द्वारा |

कपिल मिश्रा को हाईकोर्ट से झटका: भड़काऊ टिप्पणी मामले में ट्रायल पर रोक से इनकार
फोटो: कपिल मिश्रा को हाईकोर्ट से झटका: भड़काऊ टिप्पणी मामले में ट्रायल पर रोक से इनकार
दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा को दिल्ली हाईकोर्ट से एक बड़ा और अप्रत्याशित झटका लगा है। हाईकोर्ट ने 2020 के विधानसभा चुनाव से पहले उनके द्वारा कथित तौर पर की गई भड़काऊ टिप्पणी से जुड़े मामले में ट्रायल कोर्ट में चल रही कानूनी कार्यवाही पर तत्काल रोक लगाने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। कपिल मिश्रा के वकील जेठमलानी ने हाईकोर्ट के समक्ष जोरदार अपील की थी कि ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए, लेकिन उनकी यह गुहार पूरी तरह नाकाम रही। इस मामले में अब अगली सुनवाई 19 मई को होने वाली है। जस्टिस रविंद्र डुडेजा की पीठ ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग को अस्वीकार करते हुए तर्क दिया कि मिश्रा के खिलाफ आरोप तय करने का मसला बुधवार को निचली अदालत के सामने सूचीबद्ध है, और इस प्रक्रिया से उनकी सार्वजनिक छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने की संभावना हो सकती है। 

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि इस शुरुआती चरण में मुकदमे की कार्यवाही को रोकना जरूरी नहीं है, और ट्रायल को आगे बढ़ाने से किसी भी पक्ष के साथ कोई पक्षपात या अन्याय नहीं होगा। कोर्ट ने मिश्रा की ओर से पैरवी कर रहे वकील जेठमलानी से सवाल करते हुए कहा, “यह आग्रह क्यों? क्या आपको लगता है कि ट्रायल शुरू होने के चरण में ही आपको बरी करने का फैसला ले लिया जाए? ट्रायल पर रोक लगाने की कोई ठोस वजह नजर नहीं आती। कार्यवाही को जारी रखने से किसी भी तरह का पक्षपात नहीं होगा। यह भी संभव है कि आरोप तय करने के चरण में आपको राहत मिल जाए। तब तक ट्रायल कोर्ट को अपनी प्रक्रिया पूरी करने का मौका दिया जाना चाहिए। 

कार्यवाही पर रोक लगाना उचित नहीं है। भले ही ट्रायल कोर्ट आपके खिलाफ आरोप तय कर दे, तब भी यह प्रक्रिया बेकार नहीं होगी। कोई रोक नहीं लगाई जा सकती। आरोपों पर विचार करना एक अलग और स्वतंत्र प्रक्रिया है। कुछ ठोस सामग्री और सबूत मिले हैं, जिसके आधार पर इस मामले में नोटिस जारी किया गया है।” हालांकि, हाईकोर्ट ने कपिल मिश्रा की उस याचिका पर नोटिस जारी करने का फैसला किया, जिसमें उन्होंने निचली अदालत के 7 मार्च के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ जारी समन को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था। इसके साथ ही, हाईकोर्ट की पीठ ने ट्रायल कोर्ट को सख्त और स्पष्ट निर्देश दिए कि वह विशेष जजों की किसी भी टिप्पणी या राय से प्रभावित हुए बिना, दोनों पक्षों द्वारा पेश की गई स्वतंत्र और निष्पक्ष दलीलों के आधार पर आरोप तय करने के मुद्दे पर विचार करे। अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में यह भी जोड़ा, “यह स्पष्ट रूप से निर्देशित किया जाता है कि आरोप तय करने के सवाल पर फैसला लेते समय ट्रायल कोर्ट संबंधित पक्षों द्वारा प्रस्तुत की गई स्वतंत्र और तथ्यपरक दलीलों को ही आधार बनाएगा।”

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