कोर्ट ने इस दलील से सहमति जताते हुए कहा कि चिंतादा स्वयं यह स्वीकार कर रहे हैं कि वे पिछले 10 वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त नहीं है। न्यायमूर्ति हरिनाथ ने यह भी कहा कि अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम का उद्देश्य उन व्यक्तियों को संरक्षण देना है जो इन समुदायों में रहते हुए ऐतिहासिक भेदभाव और सामाजिक उत्पीड़न का शिकार रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से उस सामाजिक ढांचे से बाहर निकल चुका है, तो उसे उस संरचना के अंतर्गत मिलने वाले विशेषाधिकारों का लाभ नहीं मिल सकता।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल कानूनी नहीं बल्कि संवैधानिक सिद्धांतों का भी विषय है। भारत का संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 यह निर्धारित करता है कि अनुसूचित जातियों की मान्यता केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए है, वे धर्म जो भारत में उत्पन्न हुए हैं। यदि कोई व्यक्ति मुस्लिम या ईसाई धर्म अपना लेता है, तो वह व्यक्ति तकनीकी रूप से एससी की श्रेणी से बाहर हो जाता है।
यह वही बात है जो केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 में सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे के माध्यम से कही थी। केंद्र ने यह दलील दी थी कि जब कोई व्यक्ति इस्लाम या ईसाई धर्म स्वीकार करता है, तो वह स्वयं को उस सामाजिक परंपरा से अलग कर लेता है जहाँ जातिगत भेदभाव व्याप्त है। और चूंकि इन धर्मों में जाति व्यवस्था को धार्मिक आधार पर मान्यता नहीं है, इसलिए ऐसे लोगों को आरक्षण या एससी-एसटी अधिनियम के तहत संरक्षण देना न्यायसंगत नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी संदर्भ में यह टिप्पणी की थी कि यदि कोई व्यक्ति केवल आरक्षण के लाभ उठाने के लिए फिर से हिंदू धर्म में लौटता है, तो यह न केवल संविधान बल्कि सामाजिक न्याय की भावना के साथ भी धोखा है। ऐसे मामलों में व्यक्ति को विश्वसनीय प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे और संबंधित समुदाय से सामाजिक स्वीकृति भी प्राप्त करनी होगी।
न्यायमूर्ति हरिनाथ ने अपने निर्णय में अक्कला रामी के विरुद्ध दर्ज एफआईआर को निरस्त करते हुए इस बात पर जोर दिया कि कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए और जांच एजेंसियों को इस प्रकार के मामलों में सतर्कता बरतनी चाहिए। यह फैसला एक व्यापक संदेश देता है कि संवैधानिक संरक्षण केवल उन्हीं लोगों के लिए है जो उस सामाजिक परिस्थिति का हिस्सा हैं जिसकी वजह से ये विशेषाधिकार उन्हें दिए गए हैं।





