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ब्लैकलिस्टेड कंपनी का घोटाला! तिरुपति मंदिर को मिलावटी घी बेचने का खुलासा

रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर में लड्डू प्रसादम तैयार करने के लिए हर साल करीब 15,000 किलोग्राम घी की आवश्यकता होती है। भोले बाबा डेयरी 2019 से 2022 तक मंदिर |

ब्लैकलिस्टेड कंपनी का घोटाला! तिरुपति मंदिर को मिलावटी घी बेचने का खुलासा
फोटो: Tirupati temple
तिरुपति के प्रसिद्ध श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में दिए जाने वाले लड्डुओं में मिलावट के सनसनीखेज मामले में सीबीआई के नेतृत्व वाली विशेष जांच टीम (SIT) ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों पर मंदिर प्रशासन को मिलावटी घी की आपूर्ति करने का गंभीर आरोप है। गिरफ्तार व्यक्तियों की पहचान भोले बाबा डेयरी के पूर्व निदेशकों विपिन जैन और पोमिल जैन, वैष्णवी डेयरी के अपूर्व चावड़ा और एआर डेयरी के राजू राजशेखरन के रूप में हुई है। जांच में यह भी सामने आया है कि इस घोटाले से जुड़े कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश से भी की गई है।

इस बीच, SIT द्वारा स्थानीय अदालत में दाखिल की गई रिमांड रिपोर्ट से चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जिस फर्म को टेंडर प्रक्रिया में अयोग्य घोषित कर ब्लैकलिस्ट किया गया था, उसने प्रॉक्सी कंपनियों के जरिए तिरुपति मंदिर को मिलावटी घी की आपूर्ति की। मंदिर प्रशासन (तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम - TTD) द्वारा निष्कासित की गई भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी प्राइवेट लिमिटेड ने अपनी सहयोगी कंपनियों वैष्णवी डेयरी और एआर डेयरी के माध्यम से घी की आपूर्ति जारी रखी।

रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर में लड्डू प्रसादम तैयार करने के लिए हर साल करीब 15,000 किलोग्राम घी की आवश्यकता होती है। भोले बाबा डेयरी 2019 से 2022 तक मंदिर प्रशासन को 291 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से घी की आपूर्ति कर रही थी। हालांकि, जब TTD ने 2022 में कंपनी की सुविधाओं का निरीक्षण किया, तो यह पाया गया कि इसकी उत्पादन प्रक्रिया मानकों के अनुरूप नहीं थी। इसके बाद इस कंपनी को टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया, लेकिन फिर भी इसके प्रॉक्सी संस्थान मंदिर को घी की आपूर्ति करते रहे।

रिमांड रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। 2020 में वैष्णवी डेयरी और 2024 में एआर डेयरी ने घी आपूर्ति का टेंडर जीता, लेकिन एआर डेयरी ने यह टेंडर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल किया था। रिपोर्ट में यह आरोप लगाया गया है कि भोले बाबा डेयरी ने अपने प्रतिनिधियों की मदद से टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर किया, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसके प्रॉक्सी ठेकेदार मंदिर प्रशासन से अनुबंध हासिल कर सकें।

टेंडर के अनुसार, एआर डेयरी को एगमार्क मानक के अनुसार शुद्ध घी की आपूर्ति करनी थी, लेकिन जांच में सामने आया कि उसने मिलावटी घी सप्लाई किया और इसके लिए फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किए गए। इतना ही नहीं, मंदिर प्रशासन को जो घी सप्लाई किया गया, वह वास्तव में ब्लैकलिस्टेड भोले बाबा डेयरी से खरीदा गया था। 

इस मामले को लेकर विवाद तब और बढ़ गया जब तेलुगु देशम पार्टी (TDP) सरकार ने पिछले साल आरोप लगाया था कि तिरुपति मंदिर में भक्तों को दिए जाने वाले लड्डू प्रसाद में जानवरों की चर्बी मिलाई गई थी। इस दावे के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने जांच का जिम्मा SIT को सौंप दिया। जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय टीम में सीबीआई और आंध्र प्रदेश सरकार के दो-दो अधिकारी और भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI) का एक विशेषज्ञ शामिल है।

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