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सांसदों का बढ़ा वेतन और भत्ता: सांसदों को लाखों का वेतन, पूर्व सांसदों की पेंशन भी 31 हजार, 1 अप्रैल 2023 से लागू

केंद्र सरकार ने संसद सदस्यों के वेतन और भत्तों में उल्लेखनीय और व्यापक वृद्धि करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इसके साथ ही पूर्व सांसदों की पेंशन में भी |

सांसदों का बढ़ा वेतन और भत्ता: सांसदों को लाखों का वेतन, पूर्व सांसदों की पेंशन भी 31 हजार, 1 अप्रैल 2023 से लागू
फोटो: सांसदों का बढ़ा वेतन और भत्ता: सांसदों को लाखों का वेतन, पूर्व सांसदों की पेंशन भी 31 हजार, 1 अप्रैल 2023 से लागू
केंद्र सरकार ने संसद सदस्यों के वेतन और भत्तों में उल्लेखनीय और व्यापक वृद्धि करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इसके साथ ही, पूर्व सांसदों की पेंशन में भी काफी हद तक इजाफा करने की घोषणा की गई है। सबसे खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल, 2023 से ही प्रभावी मानी जाएगी और इसे इसी तारीख से लागू किया जाएगा। अब प्रत्येक सांसद को हर महीने 1,24,000 रुपये का संशोधित वेतन प्राप्त होगा, जो पहले महज 1,00,000 रुपये प्रति माह था। इसके अतिरिक्त, सांसदों को मिलने वाला दैनिक भत्ता भी पहले की तुलना में बढ़ाया गया है और इसे अब 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है। वहीं, पूर्व सांसदों की मासिक पेंशन में भी बदलाव करते हुए इसे 25,000 रुपये से बढ़ाकर 31,000 रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया गया है। यह संपूर्ण वृद्धि संसद सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन अधिनियम, 1954 के तहत केंद्र सरकार को प्रदत्त शक्तियों के आधार पर की गई है।

 यह बढ़ोतरी आयकर अधिनियम, 1961 में परिभाषित लागत मुद्रास्फीति सूचकांक (Cost Inflation Index) के आंकड़ों पर आधारित है। इस संबंध में केंद्र सरकार ने औपचारिक अधिसूचना भी जारी कर दी है, जिसे संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा प्रकाशित किया गया है। इस अधिसूचना में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि संसद सदस्यों के वेतन में लागत मुद्रास्फीति सूचकांक के आधार पर कुल 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, और यह संशोधन 1 अप्रैल, 2023 से प्रभावी होगा।

हर पांच साल में होगी वेतन और भत्तों की समीक्षा


सरकारी अधिसूचना में यह भी बताया गया है कि उन पूर्व सांसदों की अतिरिक्त पेंशन में भी बढ़ोतरी की व्यवस्था की गई है, जो अपने राजनीतिक करियर में एक से अधिक कार्यकाल तक संसद के सदस्य रहे हैं। इस संशोधन के तहत अब उन्हें अपनी सेवा के प्रत्येक वर्ष के लिए अतिरिक्त पेंशन के रूप में 2,500 रुपये प्रतिमाह का भुगतान किया जाएगा, जो पहले केवल 2,000 रुपये प्रति माह था। सांसदों के वेतन और भत्तों में यह ताजा बढ़ोतरी वर्ष 2018 में लागू किए गए उस प्रावधान के अनुरूप है, जिसमें यह तय किया गया था कि सांसदों के वेतन, भत्तों और पेंशन की समीक्षा हर पांच साल में की जाएगी। 

यह समीक्षा पूरी तरह से देश में व्याप्त महंगाई दर और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर की जाती है ताकि सांसदों की आय महंगाई के अनुरूप बनी रहे। यहां यह उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार का यह कदम कर्नाटक राज्य सरकार द्वारा अपने मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के वेतन में 100 प्रतिशत की भारी-भरकम वृद्धि को मंजूरी देने के ठीक कुछ दिनों बाद आया है। हालांकि, कर्नाटक विधानसभा में इस वेतन वृद्धि के प्रस्ताव को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और गहन बहस देखने को मिली थी, जिसने वहां इस मुद्दे को और भी चर्चा का विषय बना दिया था।

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