इस बंगले को भाजपा और कांग्रेस की ओर से "शीशमहल" कहा जाता है, और इस पर लाखों रुपए खर्च करने का आरोप लगाया जा रहा है, जिसका अभी जांच चल रही है। आरटीआई के जवाब के अनुसार, इस बंगले में दो साल में 560,335 यूनिट बिजली खर्च हुई, जिसका बिल 41,51,350 रुपए है। इसका मतलब यह है कि औसतन हर दिन लगभग 767 यूनिट बिजली खपत की गई, जिसका मूल्य करीब 5700 रुपए होता है।
दिल्ली सरकार की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री के लिए हर महीने 5000 यूनिट बिजली के बिल के लिए प्रतिपूर्ति (रिइंबर्समेंट) का प्रावधान है, जबकि मंत्रियों के लिए यह सीमा 3000 यूनिट मासिक है। इसका मतलब है कि अरविंद केजरीवाल को हर महीने 5000 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलती है, जबकि उनकी औसत बिजली खपत करीब 21,000 यूनिट प्रति माह रही है।
भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर केजरीवाल पर तीखा हमला किया है। भाजपा के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक वीडियो में कहा, "शीशमहल की खर्चीली कहानी तो हम पहले ही सुन चुके हैं। हमें यह भी पता है कि केजरीवाल ने जनता के 45 करोड़ रुपए इस बंगले पर खर्च किए। अब एक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। आरटीआई से यह पता चला है कि मुख्यमंत्री के बंगले में 2 साल में बिजली का बिल 41.5 लाख रुपए था, और कुल 5.60 लाख यूनिट बिजली खपत हुई। हर दिन 5700 रुपए का बिल आया है, जो कि यह दर्शाता है कि यहां हर दिन बहुत सारे एसी चलते थे।" उन्होंने यह भी कहा कि यह वही केजरीवाल हैं जिन्होंने पहले तो वैगनार कार में घूमने का दावा किया था, लेकिन बाद में उन्होंने 1.5 करोड़ रुपए की गाड़ी खरीदी, जो कि आरटीआई से सामने आया था।
भाजपा का यह आरोप है कि अरविंद केजरीवाल ने अपने ऐशो-आराम के लिए जनता के पैसों का गलत तरीके से उपयोग किया, और उनका यह "शीशमहल" केवल एक प्रतीक है उस मानसिकता का, जिसमें सत्ता का उपयोग निजी लाभ के लिए किया जाता है।
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