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चुनाव से पहले बिहार की राजनीति में धर्म की एंट्री, तेजस्वी के टोपी पहनने और तिलक लगाने पर बवाल

बिहार विधानसभा चुनाव भले ही अभी कुछ महीने दूर हों लेकिन राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। नेता अब अपनी राजनीतिक रणनीतियों के तहत बार-बार अपने बयानों |

चुनाव से पहले बिहार की राजनीति में धर्म की एंट्री, तेजस्वी के टोपी पहनने और तिलक लगाने पर बवाल
फोटो: चुनाव से पहले बिहार की राजनीति में धर्म की एंट्री, तेजस्वी के टोपी पहनने और तिलक लगाने पर बवाल
बिहार विधानसभा चुनाव भले ही अभी कुछ महीने दूर हों, लेकिन राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। नेता अब अपनी राजनीतिक रणनीतियों के तहत बार-बार अपने बयानों और आचरण से मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। शुक्रवार को दरभंगा में राजद के नेता प्रतिपक्ष और युवराज तेजस्वी यादव का एक बार फिर दो अलग-अलग रूप देखने को मिला। पहले उन्होंने देवी अहिल्यास्थान मंदिर में जाकर माथे पर तिलक लगवाकर विधिपूर्वक पूजा की और मंदिर के पुजारी से आशीर्वाद लिया। इसके बाद, कुछ ही समय बाद उन्होंने कुम्हरौली गांव में आयोजित एक इफ्तार पार्टी में शिरकत की, जहां वे जालीदार टोपी पहने हुए नजर आए और इस बार उनके माथे पर तिलक नहीं था।

 तेजस्वी यादव के इस दोहरे रूप को लेकर बिहार की सियासत में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। नीतीश सरकार के मंत्री जीवेश मिश्रा और संजय सरावगी ने तेजस्वी पर आरोप लगाया कि उन्हें सनातन धर्म से नफरत है। मंत्री जीवेश मिश्रा ने कहा कि तेजस्वी यादव ने इफ्तार पार्टी में जाने के लिए जानबूझकर अपने माथे का तिलक धो दिया, जो यह दर्शाता है कि वे अपने धर्म का सम्मान नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि जब वे अपने धर्म का सम्मान नहीं करते, तो वे दूसरे धर्मों का सम्मान कैसे करेंगे। 

जीवेश मिश्रा ने यह आरोप भी लगाया कि तेजस्वी यादव को सनातन धर्म और तिलक से नफरत है, जबकि टोपी से उनका पुराना प्रेम स्पष्ट है। वहीं, मंत्री संजय सरावगी ने भी इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब तेजस्वी यादव दरभंगा पहुंचे, तो उनके दो अलग-अलग रूप सामने आए। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव ने पहले एक मंदिर में जाकर तिलक कराया, लेकिन कुछ ही देर बाद, उन्होंने जालीदार टोपी पहने हुए इफ्तार पार्टी में भाग लिया। सरावगी का कहना था कि इस बदलाव से उनकी असली सच्चाई सामने आ गई है। उनके लिए तिलक से नफरत और टोपी से प्रेम एक स्पष्ट संदेश है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की जनता आने वाले चुनाव में तेजस्वी यादव के इस दोहरे रवैये का करारा जवाब देगी। 

 इस पूरे घटनाक्रम से यह सवाल उठता है कि क्या नेताओं की व्यक्तिगत आस्थाएं और उनके धार्मिक प्रतीकों के प्रति व्यवहार सियासी साख पर असर डाल सकते हैं? क्या एक नेता का धर्म के प्रतीकों के प्रति रवैया चुनावी मुद्दा बन सकता है? बिहार में सियासी माहौल अब पूरी तरह से गर्म हो चुका है और आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि तेजस्वी यादव का यह रवैया उन्हें कितना फायदा या नुकसान पहुंचाता है।

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