उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उदाहरण देते हुए कहा कि इस अभियान में देशवासियों ने ‘मेक इन इंडिया’ की ताकत और महत्व को महसूस किया। उन्होंने कहा, “मेक इन इंडिया भारत की सुरक्षा और समृद्धि का अनिवार्य हिस्सा है। यदि हमारे पास यह क्षमता नहीं होती, तो हमारी सेनाएं निचले पाकिस्तान से लेकर पीओके तक आतंकवाद के खिलाफ इतनी प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पातीं।”
राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान के साथ संवाद की नई रणनीति का भी खुलासा किया। उन्होंने कहा, “अब जब भी बातचीत होगी, तो वह केवल आतंकवाद और पीओके के मुद्दों तक सीमित रहेगी। आतंकवाद का कारोबार अब पाकिस्तान के लिए महंगा साबित हो चुका है।”
राजनाथ सिंह ने पीओके के निवासियों के प्रति अपनाए गए स्नेहपूर्ण दृष्टिकोण पर भी जोर देते हुए कहा, “पीओके में रहने वाले हमारे अधिकांश भाई-बहन भारत से गहरा लगाव महसूस करते हैं। कुछ गुमराह किए गए लोग हैं, लेकिन हमें भरोसा है कि प्रेम, एकता और सच्चाई के मार्ग पर चलते हुए वह दिन दूर नहीं जब पीओके भारत की मुख्यधारा में लौटेगा।”
राजनाथ सिंह ने पीओके के लोगों की स्थिति की तुलना वीर योद्धा महाराणा प्रताप के छोटे भाई शक्ति सिंह से की, जो हमेशा भारत के प्रति समर्पित थे। उन्होंने कहा, “पीओके का भारत में समावेश इस देश की सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक समृद्धि का प्रतीक होगा।”
यह स्पष्ट संदेश है कि भारत अपने क्षेत्रीय अखंडता के प्रति सशक्त प्रतिबद्ध है और आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रखेगा।





