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"राजीव गांधी की शिक्षा पर उठे सवाल": अमित मालवीय ने मणिशंकर अय्यर का वीडियो किया शेयर

अमित मालवीय ने इस वीडियो को साझा करते हुए लिखा, राजीव गांधी ने पढ़ाई में संघर्ष किया यहां तक कि कैम्ब्रिज में भी फेल हो गए जहां पास होना आसान माना जाता है।

"राजीव गांधी की शिक्षा पर उठे सवाल": अमित मालवीय ने मणिशंकर अय्यर का वीडियो किया शेयर
फोटो: Rajiv Gandhi education
भाजपा नेता अमित मालवीय ने बुधवार को अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की शिक्षा को लेकर सवाल उठाए। इस वीडियो में अय्यर यह कहते नजर आ रहे हैं कि राजीव गांधी पढ़ाई में संघर्ष कर रहे थे और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में फेल हो गए थे, जहां पास होना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। इसके बावजूद उन्होंने इंपीरियल कॉलेज लंदन में दाखिला लिया, लेकिन वहां भी असफलता का सामना करना पड़ा। 

अमित मालवीय ने इस वीडियो को साझा करते हुए लिखा, "राजीव गांधी ने पढ़ाई में संघर्ष किया, यहां तक कि कैम्ब्रिज में भी फेल हो गए, जहां पास होना आसान माना जाता है। इसके बाद वे इंपीरियल कॉलेज लंदन चले गए, लेकिन वहां भी असफल रहे। कई लोगों ने सवाल उठाया कि उनके जैसे अकादमिक रिकॉर्ड वाले व्यक्ति को प्रधानमंत्री कैसे बनाया गया? अब पर्दा हट रहा है।" हालांकि, राजीव गांधी की शैक्षणिक असफलताएं उनके राजनीतिक करियर में बाधा नहीं बनीं। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, वे प्रधानमंत्री बने और देश की बागडोर संभाली। 

 

मणिशंकर अय्यर पहले भी विवादों में रह चुके हैं। हाल ही में उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध को संदर्भित करते हुए उसे "कथित चीनी आक्रमण" बताया था, जिससे विवाद खड़ा हो गया। उन्होंने ये बयान कल्लोल भट्टाचार्जी की पुस्तक 'नेहरू के पहले रंगरूट: स्वतंत्र भारत की विदेश नीति बनाने वाले राजनयिक' के विमोचन कार्यक्रम में दिया था। मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा, "अक्टूबर 1962 में, चीन ने भारत पर कथित रूप से आक्रमण किया था।" 

गौरतलब है कि 1962 का भारत-चीन युद्ध अक्टूबर और नवंबर के बीच लड़ा गया था, जब चीनी सेना ने 'मैकमोहन रेखा' पार करके भारतीय क्षेत्र में हमला किया और अक्साई चिन पर कब्जा कर लिया। इस युद्ध में भारत को भारी नुकसान हुआ था, जिसमें 7,000 से अधिक सैनिक मारे गए या बंदी बना लिए गए। हालांकि, नवंबर 1962 में चीन ने अधिकांश कब्जे वाले क्षेत्रों से अपनी सेना वापस बुला ली, लेकिन अक्साई चिन पर उसने अपना नियंत्रण बनाए रखा।