दिल्ली में नई सरकार के गठन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर मंथन तेज हो गया है। पार्टी राजधानी को 'मिनी भारत' के रूप में प्रस्तुत करने की रणनीति पर विचार कर रही है। इसी कड़ी में नए मंत्रिमंडल में दो उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति का विकल्प भी गंभीरता से परखा जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस कदम से विभिन्न जातियों, समुदायों और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि के विधायकों को समायोजित करने में आसानी होगी, जिससे भाजपा को सत्ता संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि दो उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति का मॉडल पहले भी कई भाजपा-शासित राज्यों में सफल रहा है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में इस रणनीति को अपनाकर विभिन्न पृष्ठभूमियों के नेताओं को प्रतिनिधित्व दिया गया था। हालांकि, दिल्ली में इस पर अंतिम निर्णय पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा।
सरकार गठन की प्रक्रिया में तेजी संभव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से लौटने के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है। पार्टी नेतृत्व मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के नामों पर अंतिम फैसला करेगा। इस बीच, दिल्ली भाजपा विधायक दल की बैठक रविवार को संभावित है, जिसमें सदन के नेता का चुनाव किया जाएगा। यही नेता दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री बनेगा।
मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदार
मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। नयी दिल्ली सीट से आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल को हराने वाले प्रवेश वर्मा प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। इसके अलावा, दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, सतीश उपाध्याय, मनजिंदर सिंह सिरसा, पवन शर्मा, आशीष सूद, रेखा गुप्ता और शिखा राय भी संभावित नामों में गिने जा रहे हैं। साथ ही, पार्टी में कुछ नए विधायकों, जैसे करनैल सिंह और राज कुमार भाटिया के नामों पर भी विचार किया जा रहा है।
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