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दिल्ली में जाट-गुज्जरों का झुकाव भाजपा की ओर, ड्राइंग रूम मीटिंगों से बदला चुनावी खेल

दिल्ली भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रमुख सुनील यादव ने बताया कि पार्टी ने इस बार ओबीसी समुदायों को संगठित करने के लिए 52 समूहों के 24 क्लस्टर बनाए, जिनमें जाट, |

दिल्ली में जाट-गुज्जरों का झुकाव भाजपा की ओर, ड्राइंग रूम मीटिंगों से बदला चुनावी खेल
फोटो: Jat-Gujjars, BJP, Delhi
दिल्ली विधानसभा चुनावों में भाजपा ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए न केवल 27 साल बाद सत्ता में वापसी की, बल्कि उन ग्रामीण सीटों पर भी जीत हासिल की जहां 2015 और 2020 में आम आदमी पार्टी (AAP) का दबदबा था। भाजपा की इस जीत में जाट और गुज्जर बहुल इलाकों में बनाई गई नई रणनीति और ओबीसी वोट बैंक को साधने की योजना का अहम योगदान रहा। दिल्ली भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रमुख सुनील यादव ने बताया कि पार्टी ने इस बार ओबीसी समुदायों को संगठित करने के लिए 52 समूहों के 24 क्लस्टर बनाए, जिनमें जाट, गुज्जर, यादव, सैनी, प्रजापति और रामगढ़िया शामिल थे। इन प्रयासों के चलते भाजपा को इन इलाकों में लगभग 50% ओबीसी वोट मिले, जो उसकी जीत में निर्णायक साबित हुए।

कैसे लाखों लोगों तक पहुंची भाजपा?


भाजपा ने 24,000 से अधिक छोटे सम्मेलनों और 10-10 लोगों की बैठक के जरिए बूथ स्तर पर संपर्क साधा। इस दौरान 65,000 से अधिक लोगों ने इन बैठकों की जानकारी साझा की, जिससे लगभग 1 लाख मतदाताओं तक पार्टी का संदेश पहुंचा। गांवों के समर्थन ने बढ़ाया भाजपा का मनोबल दिल्ली के 360 गांवों के नेताओं ने पहले चुनावों के बहिष्कार का ऐलान किया था, लेकिन 22 दिसंबर 2024 को मंगोलपुरी कलां में हुई महापंचायत के बाद उन्होंने भाजपा का समर्थन करने का निर्णय लिया। चुनाव से ठीक पहले, 1 फरवरी को "पालम 360" संगठन के प्रमुख सुरेंद्र सोलंकी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर भाजपा के प्रति समर्थन जताया।

बदलाव का असर: 18 में से 13 सीटों पर भाजपा की जीत


भाजपा की रणनीति और "पालम 360" के समर्थन के चलते 18 ग्रामीण सीटों में से 13 पर भाजपा को जीत मिली, जिनमें से 6 सीटों पर 50% से अधिक अंतर से जीत दर्ज की गई। 2020 में इन 18 सीटों में भाजपा को सिर्फ 1 सीट मिली थी, जबकि इस बार उसका प्रदर्शन दोगुना से भी अधिक प्रभावशाली रहा। ग्रामीण सीटों पर भाजपा ने अपने वोट प्रतिशत में 6.75% की बढ़ोतरी दर्ज की, जो 2020 में 37.93% से बढ़कर 44.68% हो गया। दूसरी ओर, AAP का वोट शेयर 56.23% से घटकर 43.03% रह गया, और उसकी सीटें 17 से घटकर सिर्फ 5 रह गईं।

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