"सिखों-हिंदुओं की तरह हमें भी हक चाहिए"
AIMPLB के अध्यक्ष खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि भारत में सभी धर्मों को अपनी संपत्तियों पर समान अधिकार प्राप्त हैं। उन्होंने कहा, "जिस तरह सिख और हिंदू समुदाय को अपनी धार्मिक संपत्तियों पर स्वायत्तता प्राप्त है, ठीक उसी तरह मुस्लिम समुदाय को भी अपने वक्फ की देखरेख और प्रबंधन का अधिकार होना चाहिए।"
उन्होंने मौजूदा वक्फ कानून को संविधान के तहत वैध बताते हुए कहा कि सरकार इस कानून में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान लेकर आ रही है, जो धार्मिक स्वायत्तता के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।
रहमानी ने कहा कि नए कानून के तहत वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्य नियुक्त किए जाएंगे और सरकार की ओर से नामित अधिकारी का मुस्लिम होना भी अनिवार्य नहीं होगा। उन्होंने इसे सरकार की एक सोची-समझी रणनीति करार दिया और कहा कि यह सीधा-सीधा धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने की कोशिश है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
"हमारी लड़ाई हक की, न कि हिंदू-मुसलमान की"
AIMPLB प्रमुख ने सरकार पर गलत सूचनाएं फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वक्फ संपत्तियों को लेकर "यह कहना बिल्कुल निराधार है कि एक दिन पूरा देश वक्फ का हो जाएगा।" उन्होंने जोर देकर कहा कि यह हिंदू-मुसलमान का मुद्दा नहीं है, बल्कि सरकार द्वारा एक समुदाय के धार्मिक अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश है। उन्होंने सभी न्यायप्रिय हिंदुओं से अपील की कि वे इस संघर्ष में उनका साथ दें।
AIMPLB ने कॉमन सिविल कोड को भी इस पूरे विवाद से जोड़ते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया। रहमानी ने कहा, "हर समुदाय के अपने धार्मिक और सामाजिक नियम होते हैं। सरकार कैसे एक ही कानून को सभी पर थोप सकती है?" उन्होंने आगे कहा कि देश में बेरोजगारी, गैर-बराबरी और छुआछूत जैसे गंभीर मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय सरकार धार्मिक मामलों में दखल देने में लगी है, जो पूरी तरह अनुचित है।
"हम कानूनी लड़ाई के लिए तैयार"
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वाइस प्रेसिडेंट अरशद मदनी ने ऐलान किया कि कपिल सिब्बल इस मामले में उनके वकील हैं, और वे इस बिल को कानूनी रूप से चुनौती देंगे। उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद भी इस संघर्ष में AIMPLB के साथ खड़ी है। AIMPLB ने सरकार को चेतावनी दी कि अगर वक्फ कानून में एकतरफा बदलाव किए गए, तो मुस्लिम समुदाय इसके खिलाफ हर स्तर पर विरोध करेगा। बोर्ड ने कहा कि सरकार को भाईचारे और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए इस बिल पर पुनर्विचार करना चाहिए।
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