Molitics Logo
होम राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर बनेगी पूर्व राष्ट्रपति ‘प्रणब मुखर्जी’ की स्मृति, मनमोहन सिंह पर चुप्पी क़ायम!

राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर बनेगी पूर्व राष्ट्रपति ‘प्रणब मुखर्जी’ की स्मृति, मनमोहन सिंह पर चुप्पी क़ायम!

पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे प्रणब मुखर्जी की याद में राजघाट के पास स्थित राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर एक भव्य स्मारक बनाए जाने का निर्णय लिया |

राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर बनेगी पूर्व राष्ट्रपति ‘प्रणब मुखर्जी’ की स्मृति, मनमोहन सिंह पर चुप्पी क़ायम!
फोटो: Pranab Mukherjee, Manmohan Singh
पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे प्रणब मुखर्जी की याद में राजघाट के पास स्थित राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर एक भव्य स्मारक बनाए जाने का निर्णय लिया गया है। यह जानकारी उनकी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने हाल ही में दी थी और उन्होंने मोदी सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कदम उनके पिता का सम्मान करने वाला है। शर्मिष्ठा ने कहा कि यह निर्णय न केवल उनके पिता के योगदान को याद रखने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उनके सम्मान की दिशा में भी एक सराहनीय कदम है। 

प्रणब मुखर्जी का योगदान राजनीति, सार्वजनिक जीवन और देश की सेवा में अभूतपूर्व रहा है, और इस स्मारक के निर्माण से उनकी विरासत को सहेजा जाएगा। इस बीच, दिसंबर 2024 के आखिरी सप्ताह में स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में भी सवाल उठने लगे हैं कि उनका स्मारक कहां और किस स्थान पर बनाया जाएगा। पिछले दिनों खबर आई थी कि राष्ट्रीय स्मृति स्थल और विजय घाट का सर्वे किया गया है, और इन दोनों जगहों में से किसी एक स्थान पर मनमोहन सिंह का स्मारक बनाया जा सकता है। इसके लिए उनके परिवार से भी राय ली जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह स्थान उनके योगदान के अनुरूप हो। 

 शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस विषय पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जल्दी ही इस बारे में एक सकारात्मक खबर सामने आएगी। उन्होंने यह भी बताया कि एक से दो दिन के भीतर इस मामले में कोई ठोस निर्णय लिया जा सकता है और संभावित स्थानों पर विचार किया जाएगा। खट्टर ने संकेत दिया कि सरकार इस मुद्दे पर पूरी गंभीरता से विचार कर रही है और जल्द ही इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा। मनमोहन सिंह के परिवार द्वारा राजघाट परिसर में उन स्थानों का दौरा करने की जानकारी सामने आई है, जहां उनका स्मारक बनाए जाने का प्रस्ताव दिया गया था। 

हालांकि, इस समय यह स्पष्ट नहीं है कि परिवार ने किस स्थान को बेहतर माना है और सरकार ने इसके बारे में क्या राय दी है। लेकिन खट्टर के बयान से यह साफ है कि यह प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि यूपीए सरकार ने 2013 में एक नीति बनाई थी, जिसके तहत प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की मृत्यु के बाद उनके स्मारक बनाने के लिए राष्ट्रीय स्मृति स्थल को ही एक मान्यता प्राप्त स्थल के रूप में तय किया गया था। ज्ञानी जैल सिंह की समाधि को भी इसी नीति के तहत एकता स्थल के पास स्थापित किया गया था।

 मनमोहन सिंह के निधन के बाद इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई थी, खासकर इस बात को लेकर कि उनका अंतिम संस्कार निगम बोध घाट पर क्यों किया गया। कांग्रेस ने इस संदर्भ में यह सवाल उठाया था कि उनके निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार उसी स्थान पर क्यों नहीं किया गया, जहां उनका स्मारक बनाया जा सके। कांग्रेस का कहना था कि पूर्व प्रधानमंत्री का सम्मान करने के लिए उनके योगदान के अनुरूप एक स्मारक का निर्माण होना चाहिए था, और इसका स्थान निगम बोध घाट से अधिक उपयुक्त हो सकता था। समग्र रूप से, यह मुद्दा न केवल मनमोहन सिंह के परिवार और कांग्रेस के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उन नेताओं के योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित करने का एक तरीका होगा जिन्होंने भारतीय राजनीति और देश की सेवा में अहम भूमिका निभाई।

Read This Also:- कांग्रेस का नया दफ्तर: मनमोहन सिंह को नजरअंदाज करने के आरोपों पर भाजपा और कांग्रेस में घमासान