भाजपा का आरोप
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा, "कांग्रेस के नए दफ्तर के बाहर कुछ पोस्टर लगाए गए हैं, जो यह इशारा करते हैं कि इस भवन का नाम इंदिरा गांधी के बजाय मनमोहन सिंह के नाम पर रखा जाना चाहिए था। यह सिर्फ एक परिवार की राजनीति का नतीजा है, जहां पार्टी एक परिवार के नाम से बाहर सोच ही नहीं सकती। कांग्रेस ने जब मनमोहन सिंह जी के निधन के दौरान राजनीति की, तब राहुल गांधी पार्टी के लिए कहीं बाहर थे, यह सभी जानते हैं।"
पूनावाला ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने देश के अन्य प्रमुख नेताओं जैसे पीवी नरसिम्हा राव और प्रणब मुखर्जी का भी अपमान किया। उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने मनमोहन सिंह जी के सम्मान को लेकर गंदी राजनीति की और नए दफ्तर के नामकरण में उन्हें नजरअंदाज कर दिया। ऐसे में यह साबित होता है कि कांग्रेस की मानसिकता कभी भी परिवार से बाहर नहीं निकल सकती, चाहे वह किसी भी सिख समुदाय का अपमान करने की बात हो या फिर किसी अन्य नेता का।"
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कांग्रेस की सफाई: नामकरण पहले से तय था
इस विवाद पर कांग्रेस ने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा है कि नए दफ्तर का नाम पहले से ही तय किया गया था और इस निर्णय में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन कुमार बंसल ने कहा, "नए भवन का नाम पहले से तय था, और यह अब तक के कांग्रेस के इतिहास और उसके उद्देश्य के अनुरूप था। मनमोहन सिंह का निधन 26 दिसंबर को हुआ था, लेकिन इस निर्णय को पहले ही लिया जा चुका था, जब वह जीवित थे।"
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने भी इस विषय पर बयान दिया और कहा, "यह हम सभी जानते हैं कि कांग्रेस का इतिहास 140 साल पुराना है, और यह नामकरण 2010 में ही तय किया गया था, जब डॉक्टर मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। उस समय सोनिया गांधी अध्यक्ष थीं और इस नाम को इंदिरा भवन रखने का निर्णय लिया गया था।"
स्मारक विवाद और सरकार पर आरोप
मनमोहन सिंह के निधन के बाद, कांग्रेस ने उनके सम्मान में एक अलग से स्मारक बनाने की मांग की थी। लेकिन केंद्र सरकार ने निगम बोध घाट को उनके अंतिम संस्कार के लिए चुना। इसके बाद कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया था कि उसने पूर्व प्रधानमंत्री का अपमान किया है। भाजपा ने इस पर पलटवार करते हुए कहा था कि कांग्रेस के शासनकाल में भी पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव का स्मारक नहीं बनवाया गया था, जिससे यह साबित होता है कि कांग्रेस खुद अपने नेताओं का सम्मान नहीं कर पाई।
कांग्रेस का नया दफ्तर और उसकी सुविधाएं
कांग्रेस का नया दफ्तर अब दिल्ली के लुटियंस जोन में स्थित 24 अकबर रोड से कुछ किलोमीटर दूर 9ए कोटला मार्ग पर शिफ्ट हो गया है। हालांकि, पार्टी ने यह साफ किया है कि वह 24 अकबर रोड को पूरी तरह से नहीं छोड़ेगी, और यह स्थान हमेशा कांग्रेस का ऐतिहासिक केंद्र रहेगा। इस नए दफ्तर का उद्घाटन कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने किया।
नया दफ्तर कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं की बढ़ती कार्यात्मक और रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है। इसमें अत्याधुनिक सुविधाओं का ध्यान रखा गया है, ताकि पार्टी के प्रशासनिक और संगठनात्मक कार्यों में और भी सुविधा हो। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दफ्तर के ग्राउंड फ्लोर पर एक हाईटेक प्रेस कॉन्फ्रेंस रूम तैयार किया गया है, जबकि बीच में रिसेप्शन और पीछे कैंटीन जैसी सुविधाएं बनाई गई हैं। इसके अलावा, टीवी डिबेट्स के लिए साउंडप्रूफ चेंबर भी तैयार किए गए हैं।
एक ऑडिटोरियम भी इस नए दफ्तर में बनाया गया है, जहां पार्टी की बड़ी बैठकों और कार्यक्रमों का आयोजन किया जा सकेगा। विभिन्न विभागों के लिए अलग-अलग कमरे और कार्यक्षेत्र तैयार किए गए हैं, ताकि पार्टी के प्रशासनिक कार्यों में कोई रुकावट न हो।
इस नए भवन का डिज़ाइन इस बात का भी संकेत है कि कांग्रेस पार्टी भविष्य में अपनी कार्यशैली और रणनीतिक दृष्टिकोण में बदलाव करने जा रही है, और यह बदलाव उसे राजनीति में और भी प्रभावशाली बनाने के लिए जरूरी हैं। इस दफ्तर की सुविधाएं पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को अधिक प्रभावशाली तरीके से काम करने की क्षमता प्रदान करेंगी, जिससे कांग्रेस की संगठनात्मक शक्ति और प्रभावी निर्णय लेने की प्रक्रिया में सुधार हो सकता है।
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