इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने शुक्रवार को जयपुर में याचिका दायर करते हुए आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बावजूद विधानसभा अध्यक्ष ने मीणा की सदस्यता रद्द करने में देरी की।
कांग्रेस का कहना है कि स्पीकर को तुरंत निर्णय लेना चाहिए था, ताकि विधानसभा की गरिमा बनी रहे। मंगलवार को कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल, जूली के नेतृत्व में, विधानसभा अध्यक्ष से मिला और ज्ञापन सौंपा, जिसमें कंवरलाल मीणा की सदस्यता तत्काल समाप्त करने की मांग की गई थी।
कंवरलाल मीणा का मामला वर्ष 2005 से जुड़ा है। उस समय झालावाड़ जिले के मनोहर थाना क्षेत्र में उपसरपंच चुनाव के बाद पुनर्मतदान की मांग को लेकर मीणा ने कथित रूप से SDM पर पिस्तौल तान दी थी। इसी मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया और तीन साल की सजा सुनाई गई।





