डिप्टी सीएम शिंदे ने तीखे शब्दों में कहा, “सबसे पहले खुद को कार्यकर्ता समझिए। गुस्से पर काबू रखें और सफलता को अपने सिर पर न चढ़ने दें।” उन्होंने कहा कि हाल की कुछ घटनाओं के चलते पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है और इसका असर सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, पूरे संगठन पर पड़ता है।
शिंदे ने कार्यकर्ताओं से कहा, “आपके कामों के लिए लोग मुझसे सवाल पूछते हैं। आपकी बदनामी मेरी बदनामी है। अपनी ऊर्जा अनावश्यक विवादों में ज़ाया न करें। कम बोलें, ज़्यादा काम करें।”
मुझे मजबूर न करें- एकनाथ शिंदे
हाल ही में शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ और संजय शिरसाट अपने विवादास्पद बयानों को लेकर आलोचना के घेरे में रहे हैं। गायकवाड़ ने तो एमएलए हॉस्टल की कैंटीन में बासी खाना परोसे जाने पर कर्मचारी को थप्पड़ मार दिया था और माफी मांगने से इनकार करते हुए कहा था कि वे ऐसा फिर करेंगे।
हालांकि शिंदे ने किसी का नाम लिए बिना कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, “जनता की नाराज़गी के चलते कुछ मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा। मुझे अपने ही लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना पसंद नहीं, लेकिन मुझे मजबूर मत कीजिए।” उन्होंने कार्यकर्ताओं को अनुशासन और जवाबदेही निभाने की सख़्त हिदायत दी।
शिंदे ने खुद को "बॉस" के बजाय "कार्यकर्ता" बताते हुए कहा, “मैं गुस्सा नहीं करता, न ही ऊपर से आदेश देता हूं। मैं एक कार्यकर्ता की तरह काम करता हूं और आपसे भी यही उम्मीद करता हूं।” उन्होंने कहा कि सत्ता और सफलता, जवाबदेही के साथ आती हैं और कार्यकर्ताओं को जमीनी हकीकत से जुड़े रहना चाहिए। बैठक में शिंदे ने यह भी कहा कि पार्टी की हालिया सफलताओं ने विपक्ष का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हमने कम समय में बहुत कुछ हासिल किया है, लेकिन इसी कारण हमें बदनाम करने की कोशिशें भी तेज़ हो रही हैं। सतर्क और जागरूक रहिए। असली परीक्षा अभी बाकी है।





