चिदंबरम ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, “ट्रंप द्वारा जल्दबाज़ी में की गई टैरिफ की घोषणा केवल भारत को सज़ा देने के लिए नहीं है। इसका असली बोझ अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। जब अमेरिकी जनता बढ़ती कीमतों की शिकायत करने लगेगी, तब उनके प्रशासन को इसका अहसास होगा।”
उन्होंने कहा कि ट्रंप की टैरिफ नीति छोटे अमेरिकी कारोबारों को भी प्रभावित करेगी। “अगर इंपोर्टेड प्रोडक्ट्स पर टैरिफ बढ़े, तो कई छोटे अमेरिकी व्यवसाय टिक नहीं पाएंगे। अमेरिका भारत जैसे बड़े सप्लायर को रातों-रात नहीं बदल सकता।”
हमें घबराने की ज़रूरत नहीं है- कार्ति चिदंबरम
कार्ति चिदंबरम ने केंद्र सरकार को आत्मविश्वास के साथ जवाब देने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “हमें घबराने की ज़रूरत नहीं है। ट्रंप के साथ एक-दो कार्यक्रम आयोजित कर लेने से कोई विशेष व्यक्तिगत रिश्ता नहीं बन जाता। भारत को अपने हितों के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। कड़ी बातचीत के ज़रिए समाधान संभव है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका भारतीय बाजार और सप्लाई चेन को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता। “अमेरिकी कंपनियों को भारत की ज़रूरत है और उनके उपभोक्ताओं को भारतीय सप्लाई चेन की। यह रिश्ता एकतरफा नहीं, दोतरफा है।”
ट्रंप ने क्या कहा?
सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ’ पर भारत को लेकर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने लिखा, “भारत रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है और फिर उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंचे दाम पर बेचकर भारी मुनाफा कमा रहा है। उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि रूस की युद्ध मशीन यूक्रेन में कितनी तबाही मचा रही है। इसलिए मैं भारत पर टैरिफ में भारी बढ़ोतरी करूंगा।”
ट्रंप की इस टिप्पणी के बाद भारत सरकार ने कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने संकेत दिया कि “देशहित में हर संभव कार्रवाई की जाएगी।”





