बैठक में उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक विभाग के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर और राज्य मंत्री दानिश अंसारी भी शामिल हुए। ओम प्रकाश राजभर ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि उन्होंने इस बैठक में कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे हैं, जिन पर अब जेपीसी चर्चा करेगी। उन्होंने कहा कि समिति अब इन प्रस्तावों पर विचार करेगी और अपनी रिपोर्ट आगामी संसद सत्र में पेश करेगी। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि बैठक के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय के हितों को ध्यान में रखते हुए कई सकारात्मक सुझाव दिए गए।
ऐशबाग ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रसीद महली ने भी बैठक में हिस्सा लिया और वक्फ बोर्ड के कार्यों का समर्थन करते हुए कहा कि वक्फ हमारी शरीयत का अहम हिस्सा है और वक्फ बोर्ड का काम इन संपत्तियों का सही तरीके से प्रबंधन करना है। उन्होंने वक्फ संपत्तियों के बारे में यह स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड के पास अधिक संपत्तियां होने का आरोप गलत है। "हमने किसी अन्य से जमीन नहीं ली है, यह हमारी बुजुर्गों की ज़मीन है," उन्होंने कहा और वक्फ संपत्तियों के बारे में गलत धारणाओं को नकारा।
प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद ने बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि बैठक में सभी पक्षों के बीच सकारात्मक चर्चा हुई है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकारें मुस्लिम समाज के हितों और उनके विकास के लिए पूरी तरह समर्पित हैं और इस बैठक के बाद सकारात्मक परिणाम निकलने की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, "हम मुस्लिम समाज के लिए हर संभव कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और यह बैठक भी उसी दिशा में एक सकारात्मक पहल है।"
बैठक में शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सदस्य, मुतावल्ली एसोसिएशन और वक्फ से जुड़े कई अन्य लोग भी शामिल थे। इसके अलावा, जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल और समिति के अन्य सदस्य असादुद्दीन ओवैसी, बृज लाल, और मोहिबुल्लाह नदवी भी बैठक का हिस्सा थे। इन सभी सदस्यों के बीच वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और उनकी संपत्तियों से जुड़ी समस्याओं पर विस्तृत चर्चा हुई। समिति की बैठक में लिए गए निर्णयों और उठाए गए मुद्दों का संसद के आगामी सत्र में महत्वाकांक्षी तरीके से समाधान करने की योजना बनाई गई है।
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