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"पहलगाम हमले पर कांग्रेस नेताओं के बयानों पर जयराम रमेश ने दी सफाई, CWC और राहुल गांधी का स्टैंड ही सही"

जयराम रमेश ने इन बयानों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, कुछ कांग्रेस नेता जो पहले महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं और वरिष्ठ नेता रहे हैं उन्होंने कुछ |

"पहलगाम हमले पर कांग्रेस नेताओं के बयानों पर जयराम रमेश ने दी सफाई, CWC और राहुल गांधी का स्टैंड ही सही"
फोटो: "पहलगाम हमले पर कांग्रेस नेताओं के बयानों पर जयराम रमेश ने दी सफाई, CWC और राहुल गांधी का स्टैंड ही सही"
पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद देशभर में गुस्सा और आक्रोश का माहौल है। पूरा देश पाकिस्तान के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है। विपक्षी दलों ने भी मोदी सरकार से कठोर कदम उठाने का आह्वान किया है और यह सुनिश्चित किया है कि सरकार को इस मुद्दे पर दृढ़ता से कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन इस बीच कुछ कांग्रेस नेताओं द्वारा दिए गए विवादित बयानों ने पार्टी की स्थिति को मुश्किल में डाल दिया है।

कांग्रेस महासचिव और सांसद जयराम रमेश ने इन बयानों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “कुछ कांग्रेस नेता, जो पहले महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं और वरिष्ठ नेता रहे हैं, उन्होंने कुछ व्यक्तिगत विचार व्यक्त किए हैं। इन विचारों से कांग्रेस पार्टी का कोई संबंध नहीं है। हम इन विचारों से खुद को अलग करते हैं। कांग्रेस के विचार केवल CWC के प्रस्ताव में और सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्षी नेता राहुल गांधी द्वारा व्यक्त किए गए विचारों से ही मेल खाते हैं। इस संवेदनशील समय में जैसे-जैसे स्थिति विकसित होगी, कांग्रेस कार्यसमिति, कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पार्टी की स्थिति को स्पष्ट करेंगे।”

कांग्रेस नेताओं के बयान


वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैफुद्दीन सोज ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि के महत्व पर टिप्पणी करते हुए कहा, “पाकिस्तान के लिए सिंचाई और पीने का पानी बहुत आवश्यक है। यदि नदी के पानी को डायवर्ट नहीं किया गया तो पंजाब और जम्मू-कश्मीर पूरी तरह से डूब सकते हैं। सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच कई युद्धों के बाद भी कायम है। यह जल संधि पाकिस्तान की जीवन रेखा है। अगर पाकिस्तान यह दावा करता है कि वह पहलगाम हमले में शामिल नहीं है, तो हमें पाकिस्तान की बात को मानना चाहिए।” हालांकि, सोज ने बाद में अपने बयान से पलटते हुए कहा कि उनका बयान गलत तरीके से समझा गया है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी इस मामले पर टिप्पणी की और कहा कि सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का होना जरूरी था, लेकिन वह उस समय बिहार के चुनाव प्रचार में व्यस्त थे। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री के लिए क्या ज्यादा महत्वपूर्ण था, यह सवाल उठता है। हम मानते हैं कि युद्ध की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन हमें केवल कड़े कदम उठाने होंगे और सुरक्षा को बढ़ाना होगा।”

कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने भी एक विवादास्पद बयान दिया था, जिसमें उन्होंने 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले को ‘विभाजन के अनसुलझे सवालों’ का परिणाम बताया। उन्होंने कहा, “आज भी हम उस बंटवारे के नतीजों के साथ जी रहे हैं। क्या आज के हिंदुस्तान में एक मुसलमान को लगता है कि उसे स्वीकार किया जाता है? क्या एक मुसलमान को लगता है कि उसका सम्मान किया जा रहा है? हमें इन सवालों के जवाब ढूंढने चाहिए। किसी भी मुसलमान से पूछिए, आपको जवाब मिल ही जाएंगे।”