कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। कांग्रेस पार्टी चाहती है कि इस विशेष सत्र में 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले और उसके बाद उत्पन्न हालात पर गंभीर चर्चा हो। खड़गे ने अपने पत्र में लिखा, "जब देश एक कठिन दौर से गुजर रहा है और एकता व एकजुटता की सबसे ज्यादा आवश्यकता है, तब संसद के दोनों सदनों का विशेष सत्र बुलाया जाना निहायत जरूरी हो गया है।" उन्होंने कहा कि संसद के माध्यम से हम इस क्रूर आतंकी हमले के खिलाफ अपने सामूहिक संकल्प और इच्छाशक्ति का एक शक्तिशाली संदेश देश और दुनिया को दे सकते हैं।
खड़गे ने जोर देकर कहा, "यह समय राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ता से खड़े होने का है। हमें उम्मीद है कि सरकार जल्द ही संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस दिशा में कदम उठाएगी।"
कांग्रेस के संचार प्रमुख जयराम रमेश ने मंगलवार सुबह इस पत्र को सार्वजनिक किया। रमेश ने कहा कि कांग्रेस पार्टी पहलगाम हमले को लेकर केंद्र सरकार के किसी भी ठोस कदम का समर्थन करेगी, बशर्ते वह राष्ट्रीय हित में हो और आतंकवाद के खिलाफ मजबूती से लड़ने की दिशा में हो।
इससे पहले, पार्टी आलाकमान ने सभी कांग्रेस नेताओं को सख्त निर्देश जारी किए थे कि वे पहलगाम हमले जैसे संवेदनशील मुद्दे पर पार्टी की आधिकारिक लाइन से इतर कोई भी सार्वजनिक बयान न दें। पार्टी ने स्पष्ट किया कि इस समय गैरजिम्मेदाराना बयानबाजी से न केवल राष्ट्रीय एकजुटता को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि इससे जनता के बीच गलत संदेश भी जाएगा।
हाल ही में कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं के विवादास्पद बयानों के चलते पार्टी को सफाई देनी पड़ी थी। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने स्पष्ट किया था कि कांग्रेस का आधिकारिक रुख वही है जो कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के प्रस्ताव, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने व्यक्त किया है।
गौरतलब है कि पहलगाम हमले के दो दिन बाद केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस ने स्पष्ट किया था कि आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए हर ठोस कदम में पार्टी सरकार का समर्थन करेगी। पार्टी नेताओं ने जोर दिया कि इस मुश्किल घड़ी में राजनीतिक मतभेद भुलाकर राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कांग्रेस का यह रुख इस बात का संकेत है कि विपक्ष भी आतंकवाद जैसे गंभीर विषयों पर राष्ट्रीय हित में सरकार के साथ खड़ा है। अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री मोदी विशेष सत्र बुलाने पर क्या फैसला लेते हैं।





