शिंदे की दो-टूक: "समझने वालों के लिए इशारा काफी है"
अबू आजमी के सस्पेंशन पर प्रतिक्रिया देते हुए शिंदे ने कहा,
"यह तो बस शुरुआत है। उन्हें सिर्फ इशारा दिया गया है, समझने वालों के लिए इशारा ही काफी होता है। उन्हें आगे से समझदारी से काम लेना चाहिए।"
उन्होंने साफ कर दिया कि महाराष्ट्र सरकार ऐसे किसी भी बयान को बर्दाश्त नहीं करेगी, जो छत्रपति शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज का अपमान करता हो।
विधानसभा में अबू आजमी को निलंबित करने का प्रस्ताव महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने पेश किया था, जिसे सदन ने मंज़ूरी दे दी। बीजेपी नेता सुधीर मुनगंटीवार ने इस पर और कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि,
"सिर्फ एक सत्र के लिए निलंबन पर्याप्त नहीं है, उन्हें पूरी तरह से विधायकी से हटाना चाहिए। छत्रपति शिवाजी महाराज पूजनीय हैं और उनका अपमान करने वालों को हम माफ नहीं करेंगे।"
सियासत गरमाने पर अबू आजमी ने मांगी माफी
मामले ने जब तूल पकड़ लिया तो अबू आजमी ने सफाई देते हुए कहा था कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। उन्होंने कहा था,
"मैं छत्रपति शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज के खिलाफ कुछ भी कहने की सोच भी नहीं सकता।"
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि,
"मैंने सिर्फ वही कहा है जो इतिहासकारों और लेखकों ने औरंगजेब के बारे में लिखा है। किसी भी महापुरुष के बारे में मैंने कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की। अगर मेरे बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं बिना शर्त माफी मांगता हूं और अपने शब्द वापस लेता हूं।"
अबू आजमी के औरंगजेब पर दिए गए बयान के चलते महाराष्ट्र के ठाणे में उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि,
"मैं 17वीं सदी के मुगल शासक औरंगजेब को क्रूर, अत्याचारी या असहिष्णु शासक नहीं मानता। फिल्मों और अन्य माध्यमों से उनकी छवि विकृत की जा रही है।"
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