शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने कहा,
"तहव्वुर राणा को भारत लाना अच्छी बात है, लेकिन मुझे लगता है कि बिहार और बंगाल चुनाव से पहले उसे फांसी पर लटका दिया जाएगा और चुनाव में उसका डंका बजाया जाएगा। यह राष्ट्रहित और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है, इसे गंभीरता से लेना चाहिए, न कि राजनीतिक मंच पर भुनाया जाना चाहिए।" संजय राउत के बयान पर पलटवार करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा,
"यह देश के लिए गर्व की बात है कि ऐसे खतरनाक आतंकवादी को भारत लाया गया है। मोदी सरकार की यह कूटनीतिक जीत है और दूसरी तरफ कुछ लोग मूर्खों की तरह बयानबाजी कर रहे हैं। मैं मूर्खों को जवाब नहीं देता।"
फडणवीस ने 26/11 हमलों को याद करते हुए कहा,
"26 नवंबर 2008 को देश ने अपने इतिहास की सबसे भयावह आतंकी घटना का सामना किया था। पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने मुंबई को 60 घंटे तक बंधक बनाकर 166 निर्दोष लोगों की जान ली थी। अजमल कसाब को जिंदा पकड़कर फांसी दी गई, लेकिन तहव्वुर राणा जैसे साजिशकर्ता वर्षों तक विदेश में सुरक्षित रहे। अब उनकी भारत वापसी न्याय की दिशा में निर्णायक कदम है।"
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि यह उनकी नेतृत्व क्षमता और कूटनीति का ही परिणाम है कि राणा को भारत लाया जा सका। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के अधीन है और महाराष्ट्र पुलिस हर संभव सहयोग करेगी। फडणवीस ने उन बयानों की आलोचना की, जिनमें 26/11 हमलों से आरएसएस को जोड़ने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा,
"जब यह मामला हमारे हाथ में था, तब अमेरिका में बंद डेविड कोलमैन हेडली का बयान दर्ज किया गया था। उसमें स्पष्ट तौर पर बताया गया कि हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई थी और उसमें वहां की सरकारी एजेंसियों की सक्रिय भूमिका थी।"





