कोर्ट में पेशी के दौरान राणा ने आग्रह किया कि उसका प्रतिनिधित्व करने वाला वकील ऐसा न हो, जो इस मामले से नाम और प्रसिद्धि हासिल करने की कोशिश करता दिखे। एडिशनल सेशन जज चंदर जीत सिंह ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए कहा कि आरोपी की बात को स्वीकार किया गया है।
जज ने कहा,
"हालांकि लीगल सर्विस अथॉरिटी एक्ट, 1987 के तहत कानूनी सहायता उपलब्ध है, लेकिन आरोपी की भावना का सम्मान करते हुए निर्देश दिया गया है कि लीगल सर्विस वकील मीडिया से इस मामले पर चर्चा नहीं करेंगे। साथ ही यदि मीडिया को वकील का नाम ज्ञात नहीं है, तो उसे बताया भी नहीं जाएगा।" राणा ने अपने वकील को निर्देश देने के लिए कुछ उपकरणों की मांग की थी। अदालत ने इस पर भी सहमति जताई और आदेश दिया कि उसे स्केचिंग टूल और कागज जैसी सामग्री दी जाए, ताकि वह अपनी बात वकील तक स्पष्ट रूप से पहुंचा सके।
राणा को NIA हेडक्वार्टर के भीतर हाई-सिक्योरिटी कोठरी में रखा गया है। सूत्रों के मुताबिक, उसे ग्राउंड फ्लोर स्थित लॉक-अप में रखा गया है, जहां CISF के जवान और NIA के दो अधिकारी 24x7 निगरानी कर रहे हैं। उसे मुख्यालय की कैंटीन से भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुएं मुहैया कराई जा रही हैं। तहव्वुर राणा, पाकिस्तान की सेना के मेडिकल कोर में पूर्व कर्मी रह चुका है। उसे अक्टूबर 2009 में शिकागो से गिरफ्तार किया गया था। उस पर 26/11 मुंबई हमलों की साजिश रचने और लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराने के गंभीर आरोप हैं।





