संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए जया बच्चन ने दावा किया कि कुंभ में अब सबसे दूषित पानी मौजूद है। उन्होंने कहा, "कुंभ में मची भगदड़ में जिन लोगों की मृत्यु हुई, उनके शवों को नदी में फेंक दिया गया, जिससे पानी प्रदूषित हो गया। इस गंभीर मुद्दे पर कोई भी बात नहीं कर रहा, जबकि यह एक बड़ी समस्या है।"
साथ ही, उन्होंने महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पर भी सवाल उठाया और कहा कि वहां सामान्य श्रद्धालुओं के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं की गई है। उन्होंने आरोप लगाया, "यह दावा किया जा रहा है कि कुंभ में करोड़ों लोग आ चुके हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में लोग एक स्थान पर कैसे इकट्ठा हो सकते हैं? यह स्पष्ट रूप से असंभव है।"
जया बच्चन का यह बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर दिनभर ट्रेंड करता रहा और उनकी टिप्पणियों को लेकर राजनीतिक और धार्मिक संगठनों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) ने इसे हिंदू आस्था और कुंभ मेले का अपमान करार दिया, और कई प्रमुख धार्मिक संगठनों ने उनके बयान को गुमराह करने वाला और असंवेदनशील बताया। इन संगठनों ने जया बच्चन से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की है।
भा.ज.पा. नेताओं का कहना है कि जया बच्चन का बयान न केवल धर्म और आस्था के मामले में अनौचित्यपूर्ण था, बल्कि यह समाज में तनाव पैदा करने वाला भी था। इसके अलावा, उनका यह भी कहना था कि ऐसे बयान देने से सिर्फ राजनीति और सांप्रदायिक मतभेदों को बढ़ावा मिलता है, जबकि कुंभ का आयोजन देश की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता को सम्मान देने का अवसर है।
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