अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि आरएसएस का मुख्य उद्देश्य देश की शिक्षा व्यवस्था पर पूरी तरह से नियंत्रण स्थापित करना है। उन्होंने दावा किया कि आज भारत की लगभग सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आरएसएस से जुड़े वाइस चांसलर नियुक्त किए जा चुके हैं और जल्द ही राज्य विश्वविद्यालयों में भी ऐसा ही होगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शिक्षा प्रणाली पूरी तरह से आरएसएस के हाथों में चली गई, तो इससे छात्रों के भविष्य पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने बेरोजगारी के मुद्दे पर भी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि केंद्र सरकार इस गंभीर विषय पर पूरी तरह से चुप है, जबकि देश के युवाओं को बेरोजगार बनाया जा रहा है।
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा प्रणाली के गिरते स्तर जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर बात करनी चाहिए, लेकिन उनकी सरकार केवल बड़े उद्योगपतियों, जैसे अंबानी और अडानी, के हितों को ध्यान में रखकर काम कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इंडिया गठबंधन की पार्टियों के बीच कुछ वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य एक ही है – आरएसएस और उसकी विचारधारा के प्रभाव को समाप्त करना।
इस प्रदर्शन में देशभर के कई छात्र संगठन शामिल हुए, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के विरोध, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा नियुक्तियों पर प्रस्तावित दिशा-निर्देशों को वापस लेने और छात्र संघों की बहाली जैसी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF), मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF), समाजवादी छात्र सभा और छात्र राष्ट्रीय जनता दल (CRJD) जैसे कई प्रमुख छात्र संगठन शामिल हुए।
राहुल गांधी ने इस मौके पर छात्रों का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी पार्टी छात्रों के हितों के लिए हमेशा लड़ती रहेगी और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल कुछ विशेष वर्गों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई केवल सरकार से नहीं, बल्कि उस विचारधारा से भी है जो शिक्षा प्रणाली को अपने नियंत्रण में लेना चाहती है। छात्र संगठनों ने इस प्रदर्शन के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास किया, ताकि उनकी मांगों को सुना जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों को अनदेखा करती है, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। इस दौरान छात्रों ने नारेबाजी करते हुए शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और समानता की मांग की।
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