यह पूरा मामला तब सामने आया जब विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक मुकेश अहलावत ने बिजली की दरों पर लगने वाले पावर परचेज एग्रीमेंट कॉस्ट (पीपीएसी) शुल्क के बारे में विस्तृत सवाल उठाया। इसके बाद आप के ही एक अन्य विधायक इमरान हुसैन ने पूरक सवाल के जरिए बिजली की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। इन सवालों के जवाब में ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने जनता को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि बिजली की दरों में कोई बढ़ोतरी न हो और दिल्लीवासियों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
हालांकि, समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को विधानसभा में एक सवाल का जवाब देते वक्त आशीष सूद ने बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना का जिक्र किया था। उन्होंने इस संभावित वृद्धि का ठीकरा पिछली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के सिर फोड़ते हुए कहा था कि उसने बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) पर 27,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज छोड़ दिया है, जिसके चलते यह स्थिति पैदा हुई है। सूद ने विस्तार से बताया कि इस बकाया राशि को वसूल करने के लिए डिस्कॉम कंपनियों को बिजली की दरों में बढ़ोतरी करने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली आप सरकार ने दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (डीईआरसी) के माध्यम से डिस्कॉम पर 27,000 करोड़ रुपये के रेगुलेटरी एसेट्स का बोझ डाला था, जिसे वसूलने के लिए बिजली कंपनियों को कीमतें बढ़ाने की छूट दी गई थी।
इसके अलावा, उन्होंने उल्लेख किया कि हाईकोर्ट के एक पुराने आदेश के तहत पिछली सरकार को डीईआरसी के जरिए टैरिफ ऑर्डर जारी करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन वह सरकार जनता के हितों की रक्षा करने और इस आदेश को प्रभावी ढंग से लागू करने में पूरी तरह विफल रही। पहले अपने बयान में सूद ने यह भी कहा था कि आने वाले समय में बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है और शायद कुछ लोग अपने निजी राजनीतिक लाभ और स्वार्थ के लिए ऐसी स्थिति उत्पन्न करना चाहते हैं। फिर भी, उन्होंने यह आश्वासन दिया कि उनकी सरकार डीईआरसी के साथ लगातार संपर्क में बनी हुई है और इस पूरे मामले पर सूक्ष्मता से नजर रख रही है ताकि जनता को किसी भी तरह का नुकसान न हो।
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