भारत की सामाजिक एकता और सांप्रदायिक सौहार्द को रेखांकित करते हुए आजाद ने कहा, "हमने बताया कि भारत में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी मिल-जुलकर रहते हैं। संसद में राजनीतिक बहस होती है, लेकिन जब बात देशहित की आती है, तो हम सब एकजुट होकर खड़े होते हैं — चाहे वह आंतरिक मामला हो या अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि का प्रश्न।"
आजाद ने यह भी बताया कि कुवैत में 10–12 लाख प्रवासी भारतीय रहते हैं, जो वहां की कुल आबादी का लगभग 20% हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि हमें उन भारतीयों पर गर्व है, जो कुवैत जैसे देशों में मेहनत और ईमानदारी से काम कर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं।
गुलाम नबी आजाद ने दोहराया कि पाकिस्तान धर्म के आधार पर बना था लेकिन आज वह खुद विघटन और अस्थिरता का शिकार है। उन्होंने कहा, "पूर्वी पाकिस्तान का अलग होकर बांग्लादेश बन जाना, और आज भी पाकिस्तान के भीतर के टकराव इस बात का प्रमाण हैं कि वह एक स्थिर राष्ट्र नहीं बन पाया। इसके विपरीत भारत ने सभी धर्मों और समुदायों को साथ लेकर एक जीवंत लोकतंत्र की मिसाल कायम की है।"
‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर पूछे गए सवाल पर आजाद ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पाकिस्तान के आम नागरिकों के खिलाफ नहीं, बल्कि वहां पनप रहे आतंकवादी ढांचे के खिलाफ थी। उन्होंने कहा, "भारतीय सेना ने यह सुनिश्चित किया कि किसी निर्दोष को नुकसान न पहुंचे। हमारा निशाना केवल आतंकी और उनके सहयोगी थे, न कि आम जनता।"
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