पीएम मोदी ने पाकिस्तान और आतंकवाद को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा,
"शरीर चाहे कितना भी स्वस्थ हो, अगर उसमें कांटा चुभा हो तो चैन नहीं मिलता। भारत ने तय कर लिया है कि आतंकवाद के उस कांटे को निकालकर रहेगा।"
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान छद्म युद्ध नहीं, सीधे तौर पर युद्ध लड़ रहा है। "6 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद जो आतंकवादी मारे गए, उन्हें पाकिस्तान में राजकीय सम्मान मिला, झंडे में लपेटकर अंतिम सलामी दी गई। यह स्पष्ट प्रमाण है कि यह केवल प्रॉक्सी वॉर नहीं, बल्कि सुनियोजित युद्ध है। अगर वे युद्ध कर रहे हैं, तो जवाब भी उसी भाषा में दिया जाएगा।"
कश्मीर मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए प्रधानमंत्री ने कहा,
"1947 में मां भारती का विभाजन हुआ। उसी रात पहला आतंकी हमला कश्मीर में हुआ। पाकिस्तान ने मुजाहिद्दीन के नाम पर कश्मीर के एक हिस्से पर कब्ज़ा किया। अगर सरदार पटेल की बात मानी गई होती और सेना को पीओके तक जाने दिया जाता, तो आज हम 75 वर्षों से आतंकवाद नहीं झेल रहे होते।" पीएम मोदी ने सिंधु जल संधि का जिक्र करते हुए कहा,
"1960 में एक समझौता हुआ कि जम्मू-कश्मीर की नदियों पर बने बांधों की तलछट सफाई नहीं की जाएगी, गेट कभी नहीं खोले जाएंगे। 60 साल तक गेट बंद रहे। परिणामस्वरूप बांधों की जल-धारण क्षमता 100% से घटकर मात्र 2-3% रह गई। मैंने केवल छोटे गेट खोलने दिए और उधर बाढ़ के हालात बन गए। मैंने अभी कुछ किया भी नहीं है, लेकिन पाकिस्तान में पसीना बह रहा है।"
गुजरात के विकास मॉडल का ज़िक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा,
"कभी गुजरात के पास सिर्फ नमक था, लेकिन आज दुनिया में हीरों के लिए जाना जाता है। यह योजनाबद्ध विकास का परिणाम है।" पीएम मोदी ने कहा,
"26 मई 2014 को मैंने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उस समय भारत की अर्थव्यवस्था 11वें स्थान पर थी। आज हम चौथे स्थान पर हैं। और अब हमारा लक्ष्य है कि भारत को तीसरे नंबर की अर्थव्यवस्था और फिर 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है।"
उन्होंने कहा,
"हमने न केवल कोविड, प्राकृतिक आपदाओं और सीमा पर तनावों से जूझा, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं। जिस देश ने हम पर 250 वर्षों तक राज किया, उसे हमने पीछे छोड़ दिया। अब कोई कहे कि धीरे चलो, तो जवाब है मोदी है तो मुमकिन है।" प्रधानमंत्री ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर कहा,
"यह सिर्फ सैन्य बल से शुरू हुआ था, लेकिन अब इसे जन-बल से जीतना होगा। 140 करोड़ देशवासियों की जिम्मेदारी है कि वे इस लड़ाई को अंतिम मंज़िल तक पहुँचाएं।"





