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गडकरी का जातिवाद पर बयान 'मारूंगा लात' सोशल मीडिया वायरल, मोदी सरकार बनी वजह

केंद्र सरकार ने बुधवार को अपनी कैबिनेट बैठक में एक अहम फैसला लिया, जिसमें पूरे देश में जाति आधारित जनगणना कराने की घोषणा की गई। सरकार का यह कदम राजनीतिक |

गडकरी का जातिवाद पर बयान 'मारूंगा लात' सोशल मीडिया वायरल, मोदी सरकार बनी वजह
फोटो: गडकरी का जातिवाद पर बयान 'मारूंगा लात' सोशल मीडिया वायरल, मोदी सरकार बनी वजह
केंद्र सरकार ने बुधवार को अपनी कैबिनेट बैठक में एक अहम फैसला लिया, जिसमें पूरे देश में जाति आधारित जनगणना कराने की घोषणा की गई। सरकार का यह कदम राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। विपक्षी दल इस फैसले को अपनी जीत मान रहे हैं, क्योंकि इससे उनकी कई मांगें पूरी होती हुई दिख रही हैं। वहीं, सत्ताधारी दल भाजपा ने इस कदम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किए गए ऐतिहासिक कार्यों का हिस्सा बताते हुए, इसे देश के हर वर्ग के उत्थान के लिए जरूरी बताया है। भाजपा ने इस कदम को समय की आवश्यकता और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। इस बीच केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह बयान उन्होंने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान दिया था, जिसमें उन्होंने जाति आधारित राजनीति और जातिवाद का विरोध किया था। 

गडकरी ने उस समय कहा था कि किसी व्यक्ति का मूल्य उसकी जाति, धर्म, भाषा या लिंग के आधार पर नहीं बल्कि उसकी गुणों और क्षमताओं के आधार पर निर्धारित किया जाना चाहिए। उनका यह बयान विशेष रूप से चर्चा में आया, क्योंकि इसमें उन्होंने जातिवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था और यहां तक कहा था, "जो जातिवाद की बात करेगा, उसे मैं लात मारूंगा।" यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोग इसे अलग-अलग कैप्शनों के साथ शेयर कर रहे हैं। गडकरी का यह बयान उस समय का है जब वे एक अल्पसंख्यक संस्थान के दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे। समारोह के दौरान उन्होंने महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की सराहना करते हुए उनके योगदान का उल्लेख किया और कहा, "जब कलाम साहब न्यूक्लियर साइंटिस्ट बने और उनके काम ने न सिर्फ हमारे देश बल्कि पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया, तो यह साबित करता है कि किसी भी व्यक्ति की पहचान उसकी जाति, पंथ, धर्म, भाषा या लिंग से नहीं, बल्कि उसके गुण और कार्यों से बनती है।" उन्होंने यह भी कहा कि हमें समाज में किसी को भी इन सभी कारकों के आधार पर प्रताड़ित नहीं करना चाहिए। 

गडकरी ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कहा, "मैंने एक बार 50,000 लोगों के बीच कहा था कि जो जातिवाद की बात करेगा, उसे मैं लात मारूंगा। उस समय कई लोगों ने मुझसे कहा कि यह बयान देकर आपने बहुत नुकसान किया है, लेकिन मैंने जवाब दिया कि जो होगा, सो होगा।" गडकरी का यह बयान न केवल उनके निजी विचारों को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि वे जातिवाद और समाज में विभाजन को समाप्त करने के पक्षधर हैं। उनका यह सख्त रुख उनकी पार्टी और देश की सामाजिक संरचना को एकजुट करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। उनके इस बयान पर अब राजनीति में कई प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, और सोशल मीडिया पर लोग इस पर अपनी अलग-अलग राय रख रहे हैं। कुछ लोग इसे सकारात्मक मान रहे हैं, तो कुछ इसे चुनावी राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। इस बयान ने फिर से यह सवाल खड़ा किया है कि क्या जातिवाद को लेकर हमारे समाज में कोई गंभीर बदलाव आ सकता है, या यह केवल एक राजनीतिक बयानबाजी है।