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मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता: भारत और यूरोपीय संघ के बीच सहमति की कितनी संभावना?

यूरोपीय संघ के अधिकारियों के मुताबिक, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के नेतृत्व में आयुक्तों का एक दल 27-28 फरवरी से भारत यात्रा पर रहेगा।

मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता: भारत और यूरोपीय संघ के बीच सहमति की कितनी संभावना?
फोटो: European Union
यूरोपीय संघ भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर गंभीर बातचीत कर रहा है। 27 सदस्यीय यह समूह अपने वाणिज्यिक हितों को ध्यान में रखते हुए व्हिस्की, वाइन, कारों जैसी वस्तुओं पर कम टैरिफ की मांग कर रहा है। सवाल यह है कि क्या भारत और यूरोपीय संघ किसी संतोषजनक समाधान पर पहुंच पाएंगे? यूरोपीय संघ के अधिकारियों के मुताबिक, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के नेतृत्व में आयुक्तों का एक दल 27-28 फरवरी से भारत यात्रा पर रहेगा। इस दौरान व्यापार और प्रौद्योगिकी प्रमुख मुद्दे होंगे। अधिकारियों का कहना है कि भारत का बाजार यूरोपीय संघ के लिए अपेक्षाकृत अभी भी बंद है, खासकर उन उत्पादों के लिए, जिनमें यूरोपीय देश वाणिज्यिक हित रखते हैं। इनमें प्रमुख रूप से कार, वाइन और स्पिरिट्स शामिल हैं।

कठिन सौदेबाजी के लिए तैयार है यूरोपीय संघ


यूरोपीय संघ का मानना है कि यह समझौता व्यावसायिक रूप से सार्थक होना चाहिए और इसमें टैरिफ, गैर-टैरिफ बाधाएं और सरकारी खरीद की प्रतिबद्धताएं शामिल हों। अधिकारियों का कहना है कि कई मुद्दों पर अब भी चर्चा लंबित है, और यूरोपीय संघ चाहता है कि भारत मजबूत प्रतिबद्धताओं के साथ आगे आए। भारत और यूरोपीय संघ के बीच अब तक नौ दौर की वार्ता हो चुकी है, और यूरोपीय संघ की टैरिफ कम करने की मांग अब भी बरकरार है। दसवें दौर की वार्ता 10-14 मार्च को ब्रसेल्स में आयोजित होगी। यदि यह समझौता हो जाता है, तो यह भारत के लिए अब तक का सबसे बड़ा FTA होगा। इससे कपड़ा, चमड़ा, समुद्री उत्पादों जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को फायदा मिलेगा और भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार खुल जाएगा।

भारत के लिए चुनौतियां और प्राथमिकताएं


भारत अपनी MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) इकाइयों के लिए रियायतों की मांग कर रहा है। भारत को चिंता है कि कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) के तहत भारतीय स्टील और एल्युमीनियम उत्पादों पर शुल्क बढ़ सकता है। यूरोपीय संघ ने हाल ही में मर्कोसुर देशों को व्यापार समझौते के तहत रियायतें दी हैं, जिससे भारत को भी इसी तरह की रियायतें मिलने की उम्मीद है। भारतीय कपड़ा निर्यात भी बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले पिछड़ रहा है। 

FTA के अभाव में भारतीय परिधान और कपड़ा निर्यात पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगता है, जिससे उसकी प्रतिस्पर्धा कमजोर हो जाती है। यूरोपीय संघ के साथ एक सफल व्यापार समझौता भारत के कपड़ा निर्यात को नई मजबूती देगा। इसके अलावा, भारत सेवा क्षेत्र में गहरी भागीदारी चाहता है और कुशल श्रमिकों की आवाजाही को सुगम बनाने की कोशिश कर रहा है। यूरोपीय संघ भारत के लिए न केवल माल निर्यात का, बल्कि सेवा निर्यात का भी प्रमुख बाजार है। 

यूरोपीय संघ के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस समझौते से उनकी उम्मीदें बहुत ऊंची हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, "हमारे पास पहले से ही एक खाका है, इसलिए हमारी अपेक्षाएं भी अधिक हैं। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि उच्च मानकों के साथ भारत के हितों को भी शामिल किया जाए।" यूरोपीय संघ के पास पहले से 76 देशों के साथ व्यापार समझौते हैं, जबकि भारत के पास काफी कम। वर्तमान में भारत यूरोपीय संघ और यूनाइटेड किंगडम दोनों के साथ व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है।

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