'सरकारी धन की होगी वसूली' – सम्राट चौधरी
डिप्टी सीएम ने कहा, "यह निर्णय न्यायालय का है और उसी के आधार पर सरकार कार्रवाई करेगी। लालू यादव हों या अन्य कोई भी, जिन्होंने घोटाला किया है, उनकी संपत्तियां जब्त कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
उन्होंने आगे कहा, "यह सरकार का नहीं, बल्कि न्यायालय का फैसला है। कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इस घोटाले में शामिल दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। अब जब सुप्रीम कोर्ट तक से सजा मिल चुकी है, तो उनकी संपत्तियों को कुर्क कर सरकारी खजाने में धन जमा कराया जाएगा।"
सम्राट चौधरी ने कहा कि दोषियों के खिलाफ पूरी सख्ती बरती जाएगी और न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
चारा घोटाला स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक माना जाता है। यह घोटाला 1990 के दशक में अविभाजित बिहार (अब बिहार और झारखंड) के पशुपालन विभाग से जुड़ा था। इसमें पशुओं के चारे और पशुपालन से संबंधित फर्जी बिलों के माध्यम से सरकारी खजाने से भारी धनराशि की हेराफेरी की गई थी।
यह घोटाला 1996 में उजागर हुआ, जब चाईबासा (अब झारखंड) के तत्कालीन उपायुक्त अमित खरे ने पशुपालन विभाग के कार्यालयों पर छापेमारी की और फर्जी बिलों के जरिए बड़े पैमाने पर धन निकासी का मामला पकड़ा।
इसके बाद मार्च 1996 में पटना हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया और 27 मार्च 1996 को पहली एफआईआर दर्ज की गई। जांच के दौरान कई अहम खुलासे हुए और धीरे-धीरे इस भ्रष्टाचार की परतें खुलती चली गईं।
चारा घोटाले में सीबीआई ने कुल 66 मामले दर्ज किए थे, जिनमें 170 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया। इनमें से कई प्रभावशाली नेताओं और अफसरों को दोषी ठहराया जा चुका है। बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री और RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव को इस घोटाले के पांच मामलों में दोषी करार दिया गया। वह अब तक सात बार जेल जा चुके हैं। पहली बार 3 अक्टूबर 2013 को चाईबासा ट्रेजरी से अवैध निकासी के मामले में उन्हें सजा सुनाई गई थी।
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