टाइम्स नाउ समिट में बोलते हुए चिराग पासवान ने अपनी राजनीति के केंद्र में हमेशा बिहार को रखा है और उनका मानना है कि उनकी राजनीतिक यात्रा की नींव "बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट" के सिद्धांत पर टिकी हुई है। चिराग ने कहा, "मेरे पिता, दिवंगत रामविलास पासवान, जिनकी केंद्र की राजनीति में अहम भूमिका रही, उनका फोकस भी राष्ट्रीय स्तर पर था, लेकिन मेरी प्राथमिकता हमेशा बिहार ही रही है। मैं बहुत लंबे समय तक केंद्र में नहीं रहना चाहता। मेरे राज्य ने मुझे बुलाया है, और मैं वहां काम करना चाहता हूं।"
चिराग ने यह भी स्पष्ट किया कि वे 2030 के विधानसभा चुनाव से पहले बिहार लौट आएंगे, ताकि राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर विपक्ष द्वारा लगातार उठाए जा रहे सवालों पर चिराग ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर व्यक्तिगत आरोप लगा कर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, जो बिल्कुल उचित नहीं है। चिराग ने कहा, "अगर आप राजनीति में हैं, तो आपको नीतियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि किसी के व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर व्यक्तिगत टिप्पणी करनी चाहिए। यह राजनीति की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।"
चिराग पासवान ने अपनी पार्टी के साथी प्रशांत किशोर (पीके) को एक अच्छा दोस्त बताते हुए कहा कि उनका साथ हमेशा महत्वपूर्ण रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि तेजस्वी और तेज प्रताप यादव को वे अपने भाइयों जैसा मानते हैं, हालांकि उनके राजनीतिक मतभेद भी हैं।
चिराग ने यह स्पष्ट किया कि ये मतभेद उनके राजनीति में कदम रखने के समय से ही थे, लेकिन इस के बावजूद वे पारिवारिक संबंधों को अहम मानते हैं।
पीके के राजनीतिक भविष्य पर चिराग ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें पहले अपने रास्ते पर चलने दिया जाए, और फिर हम देखेंगे कि उनकी यात्रा कितनी सुरक्षित और सफल साबित होती है। उनका यह बयान इस बात को दर्शाता है कि चिराग पासवान पीके के विकास को लेकर सतर्क हैं, लेकिन उन्हें इस बात का भी विश्वास है कि यदि पीके सही दिशा में काम करेंगे तो उनका राजनीतिक भविष्य उज्जवल हो सकता है।
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