भारत प्रत्यर्पण रोकने के लिए राणा ने दिया धार्मिक प्रताड़ना का तर्क
राणा ने अपनी याचिका में दावा किया है कि भारत में उसकी धार्मिक पहचान और सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण उसे प्रताड़ित किया जा सकता है या उसकी जान को खतरा हो सकता है। उसने यह भी तर्क दिया कि वह पाकिस्तानी मूल का मुसलमान और पाकिस्तानी सेना का पूर्व सदस्य है, जिससे भारतीय हिरासत में उसे यातनाएं दी जा सकती हैं। साथ ही, उसने अपनी खराब स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि भारत में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उसकी मृत्यु भी हो सकती है।
राणा के वकीलों ने यह भी दावा किया कि भारत में सरकार निरंकुश होती जा रही है, और इसके समर्थन में उन्होंने ह्यूमन राइट्स वॉच 2023 वर्ल्ड रिपोर्ट का हवाला दिया। इस रिपोर्ट में भाजपा सरकार पर धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया गया था।
26/11 हमलों में तहव्वुर राणा की भूमिका
तहव्वुर राणा, पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली का करीबी सहयोगी है। हेडली, 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था, जिसमें 174 निर्दोष लोग मारे गए थे। तहव्वुर राणा को प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) को समर्थन देने के आरोप में अमेरिका में दोषी ठहराया गया था। भारत लंबे समय से उसके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा था ताकि उसे 26/11 हमलों में उसकी भूमिका के लिए सजा दिलाई जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राणा के भारत प्रत्यर्पण की पुष्टि की थी। ट्रंप ने कहा था कि "तहव्वुर राणा भारत भेजा जाएगा, जहां वह न्याय का सामना करेगा।" इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने भी अमेरिका का आभार व्यक्त किया था।
राणा को भारत लाए जाने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत में पेश किए जाने की संभावना है। इसके बाद एनआईए उससे गहन पूछताछ के लिए हिरासत की मांग करेगी। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और सरकार के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है। राणा को डेनमार्क में एक आतंकी हमले की साजिश रचने और उसके लिए रसद सहायता प्रदान करने का दोषी पाया गया था, जिसके लिए उसे 14 साल की कैद की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, भारत में आतंकी गतिविधियों से जुड़े आरोपों से उसे बरी कर दिया गया था। डेविड हेडली ने भी अदालत में तहव्वुर राणा के खिलाफ गवाही दी थी, जिससे उसके आतंकी नेटवर्क से जुड़े होने की पुष्टि हुई थी।
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