न्यायमूर्ति गवई ने कहा, "मैं तीन साल तक सरकारी वकील रहा और इसके बाद 22 वर्षों तक न्यायधीश के रूप में कार्य किया है। अब इस अनुभव के आधार पर मैं यह कह सकता हूं कि IAS अधिकारी IPS और IFS अधिकारियों से अपनी श्रेष्ठता साबित करना चाहते हैं। यह समस्या केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में एक निरंतर मुद्दा बनी हुई है। विभिन्न राज्यों में यह शिकायत प्रचलित है कि IPS और IFS अधिकारी यह महसूस करते हैं कि वे एक ही कैडर का हिस्सा होने के बावजूद IAS अधिकारियों से जूनियर क्यों माने जाते हैं।"
सुप्रीम कोर्ट ने CAMPA फंड के दुरुपयोग को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने बताया कि यह फंड, जिसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए था, उसे गैर-स्वीकृत गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया गया।
उदाहरण के तौर पर, इस फंड का उपयोग आईफोन और लैपटॉप जैसे व्यक्तिगत उपकरणों की खरीदारी के लिए किया गया, जो कि पूरी तरह से अनुचित था। इस पर कोर्ट ने संबंधित राज्य के मुख्य सचिव से एक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फंड का दुरुपयोग किस स्तर तक हुआ है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच को आश्वस्त किया कि वह अधिकारियों के बीच ऐसे आंतरिक विवादों को सुलझाने की दिशा में कदम उठाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि अधिकारियों के बीच किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
बेंच ने इस संबंध में कहा, "CAMPA फंड का मुख्य उद्देश्य केवल और केवल हरियाली बढ़ाना और पर्यावरण की स्थिति को सुधारना है। अगर इसका दुरुपयोग होता है, तो यह न केवल गंभीर चिंता का विषय है, बल्कि यह देश की पर्यावरण नीतियों को भी प्रभावित कर सकता है। साथ ही, इस फंड के ब्याज का पैसा जमा नहीं किया जाना भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिससे यह संदेह उत्पन्न होता है कि क्या फंड का सही तरीके से उपयोग किया जा रहा है।"
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