हालांकि, उनका आरोप था कि जो किताबें आज भी हमारे समाज की असल स्थिति को परिभाषित करती हैं, उनमें ‘लेदर मैन’, ‘वॉशर मैन’ जैसे शब्दों का उल्लेख है, लेकिन निषाद समुदाय को ‘फिशर मैन’ कहकर आरक्षण से बाहर रखा गया है। उनका यह कहना था कि राजनीतिक दल समाज का वोट लेकर उनकी ज़रूरतों को नजरअंदाज कर रहे हैं और उन्हें उनके हक से वंचित कर रहे हैं।
डॉ. निषाद ने विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर निशाना साधा और कहा कि पार्टी में कुछ "विभीषण" (असंतुष्ट नेता) हैं, जिनकी वजह से बीजेपी को नुकसान हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर समय रहते इन नेताओं को पार्टी से बाहर नहीं किया गया तो इसका खामियाजा बीजेपी को भुगतना पड़ेगा। उनका यह भी कहना था कि कांग्रेस, सपा और बसपा ने भी समय-समय पर समाज के वोट बैंक का इस्तेमाल किया और सत्ता में बने रहे। अब वही लोग बीजेपी में शामिल हो गए हैं और उनका कहना था कि ये लोग ही पार्टी का वोट घटाने के लिए षड्यंत्र कर रहे हैं।
गोरखपुर सांसद रवि किशन का उदाहरण देते हुए डॉ. संजय निषाद ने कहा कि रवि किशन पहले गोरखपुर में 3.5 लाख वोटों से जीते थे, लेकिन दूसरी बार उनकी जीत का अंतर सिर्फ एक लाख वोटों तक सिमट कर रह गया। इसका कारण उन्होंने पार्टी के भीतर हो रहे षड्यंत्रों को बताया और कहा कि यह सब इन असंतुष्ट नेताओं के कारण हो रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण एक नीतिगत फैसला है और इसका समाधान केवल नेताओं से नहीं, बल्कि नीतियों के आधार पर होना चाहिए। उनका सुझाव था कि यदि नौ प्रतिशत ओबीसी से अति पिछड़ा वर्ग का हिस्सा काटकर इसे एससी में जोड़ दिया जाए तो इससे किसी प्रकार का विरोध नहीं होगा। उनका यह विचार था कि यह कदम समाज के विभिन्न वर्गों के बीच एकता और न्याय की भावना को बढ़ावा देगा।
रथ यात्रा के दौरान डॉ. संजय निषाद का जगह-जगह स्वागत हुआ। उन्होंने बताया कि यह यात्रा सहारनपुर से शुरू होकर दिल्ली तक जाएगी और इस यात्रा के माध्यम से निषाद, केवट और मल्लाह समुदाय को एससी का दर्जा देने की मांग की जाएगी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अपनी मांगों को प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुंचाना है और सामाजिक समानता के लिए संघर्ष करना है।
रुधौली पहुंचने पर कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद का कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने शानदार स्वागत किया। यहां उन्हें माला पहनाकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यदि निषाद, केवट और मल्लाह समुदाय को एससी का दर्जा मिल जाता है तो इससे समाज की एकता मजबूत होगी और यह समाज के समग्र विकास की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के भीतर किसी भी प्रकार की असमानता को खत्म करने के लिए सभी समुदायों की एकजुटता जरूरी है। उनका यह मानना था कि धर्मराज निषाद, अर्जुन निषाद, अखिलेश निषाद, बसंत लाल निषाद, प्रीतम निषाद, शंभू निषाद, मोहित निषाद सहित कई कार्यकर्ताओं और समर्थकों की सक्रिय भागीदारी से यह यात्रा और भी सफल हो सकेगी।
डॉ. संजय निषाद ने इस यात्रा के माध्यम से निषाद समुदाय की राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने और उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाने का संकल्प लिया। उनका मानना है कि केवल एकता और संगठन से ही निषाद समुदाय को उनका हक मिल सकता है। इस रथ यात्रा के माध्यम से वे यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि यदि समाज के हर हिस्से को समान अधिकार और सम्मान मिलेगा, तो यह देश की समाजवादी और समानता आधारित व्यवस्था को मजबूत करेगा।
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