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सीएम योगी के बयान पर कांग्रेस का हमला, इमरान मसूद बोले- 'हमें ही अनुशासन क्यों सिखाया जाता है?'

इमरान मसूद ने कहा, "क्या अनुशासन केवल हमें ही सिखाना है? हमने तो अनुशासन स्वीकार किया है और सड़क पर नमाज नहीं पढ़ी है। मैं खुद सड़क पर नमाज पढ़ने वालों |

सीएम योगी के बयान पर कांग्रेस का हमला, इमरान मसूद बोले- 'हमें ही अनुशासन क्यों सिखाया जाता है?'
फोटो: सीएम योगी के बयान पर कांग्रेस का हमला, इमरान मसूद बोले- 'हमें ही अनुशासन क्यों सिखाया जाता है?'
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीटीआई न्यूज एजेंसी को दिए एक इंटरव्यू में सड़क पर नमाज पढ़ने से संबंधित सवाल का जवाब देते हुए कहा कि इस मामले में लोगों को हिंदुओं से अनुशासन सीखना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सियासी बयानबाजी एक बार फिर से तेज हो गई है। मुख्यमंत्री के इस बयान पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रतिक्रिया दी।

इमरान मसूद ने कहा, "क्या अनुशासन केवल हमें ही सिखाना है? हमने तो अनुशासन स्वीकार किया है और सड़क पर नमाज नहीं पढ़ी है। मैं खुद सड़क पर नमाज पढ़ने वालों को हटाकर अलग कर चुका हूं, क्योंकि जब सरकार ने मना कर दिया है और यह सरकारी संपत्ति है, तो इस पर नमाज कबूल नहीं हो सकती।" उन्होंने आगे कहा, "जब जुलूस निकालते हैं, तो कितने घंटे सड़कें जाम रहती हैं, ये लोग दूसरों को भी अनुशासन सिखा दें। केवल हमें ही क्यों सिखाया जा रहा है? यूपी में कानून-व्यवस्था, विकास और कई अन्य महत्वपूर्ण काम हैं, क्या इन पर ध्यान नहीं दिया जा सकता?" सीएम योगी के बयान पर इमरान मसूद का कहना था कि मुख्यमंत्री को अन्य जरूरी मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

सीएम योगी- नमाज के लिए सड़क नहीं, अनुशासन जरूरी


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने बयान में कहा था कि सड़क चलने के लिए होती है, न कि धार्मिक गतिविधियों के लिए। उन्होंने कहा था, "जो लोग सड़क पर नमाज पढ़ने की बात कर रहे हैं, उन्हें हिंदुओं से अनुशासन सीखना चाहिए। कुंभ और अन्य धार्मिक आयोजनों से अनुशासन सीखा जा सकता है। पर्व और त्योहारों का उद्देश्य उद्दंडता नहीं, बल्कि अनुशासन होना चाहिए। अगर किसी को सुविधा चाहिए तो उसे अनुशासन का पालन करना सीखना चाहिए।" 

सीएम योगी ने कहा था, "कांवड़ यात्रा हरिद्वार से लेकर गाजियाबाद और अन्य क्षेत्रों तक सड़क पर ही जाती है, लेकिन हमने कभी परंपरागत मुस्लिम जुलूस को रोका नहीं। हां, हमने यह जरूर कहा कि ताजिया की साइज को छोटा किया जाए, ताकि हाईटेंशन तार से कोई हादसा न हो। कांवड़ यात्रा में भी डीजे की आवाज और साइज को नियंत्रित किया गया है। नमाज के लिए मस्जिद या ईदगाह होना चाहिए, सड़क नहीं।"

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