एफआईआर में यह आरोप लगाया गया है कि महादेव बुक ऐप के मालिकों ने पुलिस अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तियों को प्रोटेक्शन मनी के रूप में बड़ी रकम दी। उनका उद्देश्य यह था कि इन अधिकारियों से किसी प्रकार की कार्रवाई न की जाए और उनकी अवैध गतिविधियों को जारी रखने की अनुमति मिले। यह पैसा हवाला के जरिए इन अधिकारियों तक पहुंचाया जाता था, और फिर यह वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तियों तक पहुंचता था, जो अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करके इस घोटाले को बढ़ावा दे रहे थे। सीबीआई का दावा है कि कई पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए इस अवैध काम से अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए सहयोग किया।
सीबीआई ने 18 दिसंबर 2024 को इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी, और हिन्दुस्तान टाइम्स ने 21 जनवरी को यह जानकारी सबसे पहले दी थी कि सीबीआई ने छत्तीसगढ़ पुलिस से इस मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद भूपेश बघेल को भी आरोपी के तौर पर नामित किया है।
यह जानकारी सामने आने के बाद भूपेश बघेल ने अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि "मुझे सीबीआई के एफआईआर के बारे में कोई जानकारी नहीं है। जब मुझे एफआईआर की पूरी डिटेल मिलेगी, तब ही मैं इस पर कोई प्रतिक्रिया दूंगा।"
इस घटनाक्रम से भूपेश बघेल के लिए राजनीतिक और कानूनी चुनौती और भी बढ़ गई है। इस घोटाले के आरोपों ने न केवल उनकी राजनीतिक छवि को प्रभावित किया है, बल्कि उनके और उनके समर्थकों के लिए यह एक बड़ा झटका भी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सीबीआई की जांच में क्या नए तथ्य सामने आते हैं और भूपेश बघेल किस प्रकार इस आरोप का सामना करेंगे।
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