उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें सिर्फ राजपूतों का नेता कहना अपमानजनक लगता है। मैं सर्व समाज की बात करता हूं और सर्व समाज का नेता हूं । बृजभूषण सिंह ने महिला उत्पीड़न, दहेज प्रताड़ना और एससी/एसटी एक्ट जैसे कानूनों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन तीनों कानूनों से देश परेशान है और इनका दुरुपयोग हो रहा है।
उनका कहना था, “ये कानून समाज के कमजोर वर्गों की रक्षा के लिए बनाए गए थे, लेकिन अब इनका इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध के लिए हो रहा है। अगर इन्हें हटाया नहीं गया तो कम से कम इनके दुरुपयोग पर सख्त नियंत्रण होना चाहिए।”
अपने ऊपर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को बृजभूषण शरण सिंह ने एक बार फिर खारिज किया। उन्होंने कहा, “मेरे खिलाफ जो आरोप लगे हैं वे पूरी तरह से झूठे और राजनीति से प्रेरित हैं। कानूनों का इस तरह इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।” बृजभूषण सिंह ने हालिया सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की भी सराहना की और इसे “देश के लिए गर्व की बात” बताया। उन्होंने युद्धविराम के बाद उठे राजनीतिक सवालों को लेकर विपक्ष पर हमला बोला।
उन्होंने कहा, “जब 1971 में भारत ने 62 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को युद्धबंदी बनाया था, तो उस समय पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) को वापस लेने की शर्त क्यों नहीं रखी गई? उस वक्त यह शर्त रखी जा सकती थी कि ‘PoK दो, तभी सैनिक मिलेंगे।’ लेकिन तब ऐसा नहीं किया गया, अब युद्ध की राजनीति क्यों?”





