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BPSC Protest: 'अगर मांगें नहीं मानीं, तो 26 जनवरी परेड में बाधा डालेंगे' – प्रशांत किशोर का अल्टीमेटम

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार 31 जनवरी से पहले यह आदेश नहीं देती, तो वे 26 जनवरी को बिहार में आधिकारिक गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन नहीं होने देंगे।

BPSC Protest: 'अगर मांगें नहीं मानीं, तो 26 जनवरी परेड में बाधा डालेंगे' – प्रशांत किशोर का अल्टीमेटम
फोटो: Prashant Kishor, BPSC Protest,
पटना के गांधी मैदान में बीपीएससी परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर जनसुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। यह विरोध प्रदर्शन एक दिन और एक सर्द रात के बाद भी जारी है, जिसमें छात्रों के साथ बुजुर्ग भी शामिल हैं। इस बीच, प्रशांत किशोर ने कहा कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार बीपीएससी की प्रीलिम्स परीक्षा के लिए आदेश नहीं देती। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार 31 जनवरी से पहले यह आदेश नहीं देती, तो वे 26 जनवरी को बिहार में आधिकारिक गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन नहीं होने देंगे।

प्रशांत किशोर ने यह भी दावा किया कि यह विरोध सिर्फ बीपीएससी परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बिहार की नौकरशाही के खिलाफ छात्रों का बढ़ता गुस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में पिछले दस सालों में कई परीक्षाओं को गलत तरीके से आयोजित किया गया है, जिससे सरकारी तंत्र की निष्कलंकता पर सवाल उठने लगे हैं।

इसके अलावा, प्रशांत किशोर ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप भी लगाया, खासकर बीपीएससी परीक्षा में। उनका कहना था कि राज्य में 30 लाख से लेकर 1.5 करोड़ रुपये तक में सीटें बेची जा रही हैं। उन्होंने नीतीश कुमार की सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि राज्य में कांस्टेबल की परीक्षा में भी भ्रष्टाचार की जांच हो रही है, और इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

प्रशांत किशोर ने अपने आंदोलन में आए बदलाव को लेकर कहा कि यह प्रदर्शन अब जन आंदोलन में तब्दील हो सकता है। जनसुराज पार्टी के नेता ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि पिछले दस सालों में सभी परीक्षाओं की सही तरीके से जांच हो। बीपीएससी परीक्षा में भ्रष्टाचार और लाठीचार्ज के मुद्दे पर प्रशांत किशोर ने विपक्षी दलों के आरोपों को भी नकारा। उन्होंने बिहार में हुए 87 लाठीचार्ज का जिक्र करते हुए कहा कि यह आंकड़ा देश में सबसे ज्यादा है और यह सिर्फ छात्रों ही नहीं, बल्कि टीचर्स, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर भी हुआ है। प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार फिर से 1974 के जयप्रकाश नारायण आंदोलन की ओर बढ़ रहा है, जब छात्रों के एक समूह ने आंदोलन शुरू किया था। उन्होंने भाजपा की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा अब बिहार में एक बड़ी पार्टी बनने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसे इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने में कायरता दिखाई दे रही है।