आतिशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "बीजेपी ने एमसीडी को पुनर्गठित कर 272 से 250 वार्ड कर दिए, चुनाव की प्रक्रिया में देरी की, और एमसीडी डी-लिमिटेशन करवा दिया। एमसीडी चुनाव को गुजरात विधानसभा चुनाव के साथ करवा कर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश की गई। इसके बावजूद दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी को बहुमत दिया।" उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले ढाई वर्षों में बीजेपी लगातार AAP पार्षदों को खरीदने और तोड़ने का प्रयास कर रही है। “बीजेपी के इन प्रयासों के बावजूद हम न तो अपने पार्षदों को तोड़ते हैं, न ही खरीदते हैं। हम दिल्ली की जनता का सम्मान करते हैं। इसी वजह से आम आदमी पार्टी ने मेयर चुनाव में भाग न लेने का निर्णय लिया है,” आतिशी ने कहा।
AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और विधायक सौरभ भारद्वाज ने भी बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “बीजेपी ने जब एमसीडी चुनाव में हार देखी, तो डी-लिमिटेशन का सहारा लिया, फिर भी जनता ने AAP को 134 सीटें दीं।” भारद्वाज ने दावा किया कि बीजेपी अब पार्षदों को तोड़कर अपनी संख्या बढ़ाने में सफल हो गई है और अब उनके पास बहुमत है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “दिल्ली में अब ट्रिपल इंजन की सरकार है—एक केंद्र में, एक एलजी के रूप में और अब नगर निगम में भी। बीजेपी के पास अब कोई बहाना नहीं बचता, उन्हें अब दिल्ली वालों के लिए काम करके दिखाना चाहिए।”
आम आदमी पार्टी के इस ऐलान पर बीजेपी ने भी पलटवार किया है। पार्टी के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा, “AAP को इस बात का एहसास हो गया है कि वह MCD में बहुमत खो चुकी है। पिछले ढाई साल में नगर निगम का प्रशासनिक ढांचा और रख-रखाव पूरी तरह ठप्प हो गया है। इसलिए अब AAP मेयर चुनाव से हटकर त्याग का नाटक कर रही है।”
कपूर ने यह भी आशंका जताई कि आम आदमी पार्टी अब कांग्रेस से गठबंधन करने की तैयारी कर सकती है।





