बाबा रामदेव ने यह भी कहा कि संत बनने के लिए एक दिन की साधना से कुछ हासिल नहीं हो सकता। संतत्व एक अत्यंत उच्च दर्जा है, जिसे प्राप्त करने के लिए वर्षों की कठिन साधना और तपस्या की आवश्यकता होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, "हम जैसे साधुओं को संतत्व पाने में 50-50 वर्षों का तप लगा है, और महामंडलेश्वर होना तो और भी बड़ी बात है। अब देख रहा हूं कि बिना किसी गहरी साधना के लोगों को महामंडलेश्वर बना दिया जाता है, जोकि पूरी तरह से गलत है।" बाबा रामदेव ने यह भी स्पष्ट किया कि एक दिन में संत बनना किसी के लिए भी संभव नहीं है, और यह उच्चतम आध्यात्मिक स्थिति समय और निरंतर साधना के साथ ही प्राप्त की जा सकती है।
इस बयान के संदर्भ में, हाल ही में बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी के प्रयागराज महाकुंभ में पहुंचने और गृहस्थ जीवन से संन्यास लेने की घोषणा को लेकर बाबा रामदेव ने अपनी प्रतिक्रिया दी। ममता कुलकर्णी ने महाकुंभ में संगम में डुबकी लगाई और इसके बाद किन्नर अखाड़ा में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महामंडलेश्वर के रूप में उनका पट्टाभिषेक किया गया। किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरि (टीना मां) ने बताया कि इस समारोह के दौरान ममता कुलकर्णी को नया नाम 'यमाई ममता नंद गिरि' दिया गया। इस कार्यक्रम में जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी महेंद्रानंद गिरि और अन्य किन्नर महामंडलेश्वर भी उपस्थित थे।
बाबा रामदेव ने इस घटना पर भी अपनी चिंता व्यक्त की और कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अब किसी भी व्यक्ति को "महामंडलेश्वर" बना दिया जाता है, जबकि यह स्थिति एक अत्यधिक आध्यात्मिक उपलब्धि है, जिसे साधना और तपस्या के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है। उनके अनुसार, यह किसी प्रकार की आध्यात्मिक व्यापारिता और नाम का दुरुपयोग है, जो सनातन के गहरे अर्थ और उसकी महत्ता को नकारता है।
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