याचिकाकर्ता ने उठाया सवाल
याचिका दायर करने वाले वकील मैथ्यूज जे. नेदुम्परा ने अदालत से अपील की कि इस मामले को त्वरित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए, क्योंकि यह व्यापक जनहित से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कोर्ट में तर्क दिया कि यदि ऐसा मामला किसी आम नागरिक का होता, तो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी जांच एजेंसियां तुरंत हरकत में आ जातीं।
इस पर मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने कहा, "याचिका पर सुनवाई होगी, लेकिन सार्वजनिक बयानबाजी न करें।"
नेदुम्परा और तीन अन्य याचिकाकर्ताओं ने रविवार को यह याचिका दायर कर पुलिस को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की अपील की थी। इस याचिका में 1991 के के. वीरस्वामी मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी चुनौती दी गई है, जिसमें कहा गया था कि किसी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज के खिलाफ कोई भी आपराधिक कार्यवाही भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) की पूर्व अनुमति के बिना शुरू नहीं की जा सकती।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आग लगने की घटना के दौरान सबसे पहले मौके पर पहुंचने वाले पांच पुलिसकर्मियों ने अपने मोबाइल फोन दिल्ली पुलिस मुख्यालय को सौंप दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन फोनों का इस्तेमाल भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा गठित तीन सदस्यीय न्यायिक समिति द्वारा की जा रही जांच में किया जाएगा।
Read This Also:- इमरान प्रतापगढ़ी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, भड़काऊ गाने के मामले में FIR खारिज
Read This Also:- इमरान प्रतापगढ़ी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, भड़काऊ गाने के मामले में FIR खारिज





