Molitics Logo
होम इमरान प्रतापगढ़ी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, भड़काऊ गाने के मामले में FIR खारिज

इमरान प्रतापगढ़ी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, भड़काऊ गाने के मामले में FIR खारिज

यह एफआईआर उनके एक कथित "भड़काऊ" गाने को लेकर दर्ज की गई थी। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है, |

इमरान प्रतापगढ़ी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, भड़काऊ गाने के मामले में FIR खारिज
फोटो: इमरान प्रतापगढ़ी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, भड़काऊ गाने के मामले में FIR खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ गुजरात पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को रद्द कर दिया है। यह एफआईआर उनके एक कथित "भड़काऊ" गाने को लेकर दर्ज की गई थी। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है, और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना अदालत का कर्तव्य है।

न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि अदालत को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संविधान और उसके आदर्शों का उल्लंघन न हो। कविता, नाटक, फिल्म, व्यंग्य और कला जैसे साहित्यिक माध्यम मानवीय जीवन को अधिक सार्थक बनाते हैं, और इन्हें दबाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने आगे कहा कि पुलिस को लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए, न कि उन्हें कुचलना चाहिए। "सेहतमंद समाज में अभिव्यक्ति की आज़ादी का सम्मान होना चाहिए," पीठ ने अपने फैसले में यह अहम टिप्पणी की।

क्या है पूरा मामला?


इस साल 3 जनवरी को गुजरात के जामनगर में एक सामूहिक विवाह समारोह के दौरान इमरान प्रतापगढ़ी पर कथित रूप से "भड़काऊ" गीत गाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 196 (धर्म, जाति आदि के आधार पर नफरत को बढ़ावा देना) और धारा 197 (राष्ट्रीय एकता के लिए खतरनाक बयान देना) सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया था।

एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि इमरान प्रतापगढ़ी ने जिस गाने को गाया, उसके बोल "राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक" थे और इससे "धार्मिक भावनाएं आहत" हो सकती थीं। यह मामला तब और तूल पकड़ गया जब प्रतापगढ़ी ने अपने 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर एक 46 सेकंड की वीडियो क्लिप साझा की। इस वीडियो में देखा गया कि जब वह मंच पर हाथ हिला रहे थे, तो उन पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाई जा रही थीं और बैकग्राउंड में वही विवादित गाना बज रहा था। इस फैसले के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर एक मजबूत संदेश दिया है। अदालत ने साफ किया कि "किसी विचार को नापसंद करने का मतलब यह नहीं है कि उसे व्यक्त करने के अधिकार को छीना जाए।"

Read This Also:- Supreme Court calls demand for FIR against Justice Verma 'immature', dismisses petition