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Andhra Pradesh: स्पीकर ने जगन मोहन रेड्डी को विपक्षी नेता का दर्जा देने से किया इनकार, सीटों के नियम का है पूरा खेल

आंध्र प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष अय्यन्ना पात्रुडू ने पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSR Congress Party) के प्रमुख वाईएस जगन मोहन रेड्डी |

Andhra Pradesh: स्पीकर ने जगन मोहन रेड्डी को विपक्षी नेता का दर्जा देने से किया इनकार, सीटों के नियम का है पूरा खेल
फोटो: Jagan Mohan Reddy
आंध्र प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष अय्यन्ना पात्रुडू ने पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSR Congress Party) के प्रमुख वाईएस जगन मोहन रेड्डी को नेता विपक्ष का दर्जा देने से मना कर दिया है, जिससे राज्य में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा अध्यक्ष ने जगन मोहन रेड्डी की इस मांग को 'अनुचित इच्छा' करार देते हुए कहा कि किसी भी पार्टी के पास विधानसभा में कम से कम 1/10वां हिस्सा होना चाहिए ताकि उसे नेता विपक्ष का दर्जा दिया जा सके। आंध्र प्रदेश विधानसभा में कुल 175 विधायक हैं, जिसका मतलब यह है कि नेता विपक्ष के लिए पार्टी को कम से कम 18 विधायक होने चाहिए, लेकिन वाईएसआर कांग्रेस के पास वर्तमान में केवल 11 विधायक हैं। यह मामला तब सामने आया जब वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को 2019 के विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा था, जिसमें पार्टी को सिर्फ 11 सीटें मिलीं, जबकि चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी (TDP) ने 135 सीटें जीतीं और भाजपा ने आठ सीटें हासिल कीं।

 स्पीकर के तर्कों को खारिज करते हुए जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि जब विपक्षी पार्टी को विधानसभा में पर्याप्त समय नहीं मिलेगा तो विधानसभा में जनता की आवाज कैसे उठाई जाएगी? उन्होंने उदाहरण के तौर पर दिल्ली विधानसभा के 2015 चुनावों का हवाला दिया, जब भाजपा को 70 में से केवल तीन सीटें मिली थीं, और फिर भी अरविंद केजरीवाल की पार्टी 'आप' ने भाजपा को विपक्षी पार्टी का दर्जा दिया था। स्पीकर ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि विपक्षी नेता के पद के लिए पात्रता पूरी तरह से संवैधानिक प्रावधानों, कानूनी आदेशों और स्थापित मिसालों के आधार पर निर्धारित की जाती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक विपक्षी पार्टी के पास 18 विधायक नहीं होते, तब तक उस पार्टी के नेता को विपक्षी नेता के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती। 

 स्पीकर ने कहा कि जगन मोहन रेड्डी का व्यवहार निंदनीय है, क्योंकि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर हाई कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया, लेकिन हाई कोर्ट ने उनकी रिट याचिका को स्वीकार नहीं किया। स्पीकर ने कहा कि रेड्डी द्वारा बार-बार आरोप लगाए जा रहे दुर्भावनापूर्ण अभियान से वह हैरान नहीं हैं। इसके अलावा, स्पीकर ने यह भी कहा कि जगन मोहन रेड्डी द्वारा विधानसभा अध्यक्ष पर आरोप लगाना सदन की अवमानना और विशेषाधिकार हनन के समान है, और अब सदन इस प्रकार के निंदनीय आचरण को और सहन नहीं करेगा। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए, जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि वाईएसआर कांग्रेस आंध्र प्रदेश विधानसभा में विपक्षी दल के रूप में अकेली पार्टी है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा, जन सेना और टीडीपी सभी एक साथ सत्ता में हैं, और वाईएसआर कांग्रेस को केवल 11 सीटें मिलनी के बावजूद उनके पास 40% वोट शेयर है। 

रेड्डी ने सवाल किया कि यदि पार्टी को विपक्षी दल के रूप में मान्यता नहीं दी जाती, तो फिर विपक्षी दल कौन होगा? उनका यह भी कहना था कि जब पार्टी को विपक्षी दल के रूप में मान्यता मिल जाएगी, तो स्पीकर को विपक्षी दल के नेता को सदन में वक्त देने का जिम्मा उठाना चाहिए, ताकि वह अपनी पार्टी के विचार और मुद्दों को सदन में रख सके। इस पूरी स्थिति ने आंध्र प्रदेश में राजनीतिक खींचतान को बढ़ा दिया है, जहां स्पीकर और विपक्षी नेता के बीच मतभेद अब एक बड़ी राजनीतिक बहस का कारण बन चुके हैं।