CNN के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने दूसरे कार्यकाल के पहले दिन 20 झूठ बोले हैं, जो मुख्यत: अमेरिका की अर्थव्यवस्था, आप्रवासन, विदेशी नीति, इलेक्ट्रॉनिक वाहनों, और 2020 के चुनावों से संबंधित थे। वॉशिंगटन पोस्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ट्रंप के पहले कार्यकाल के पहले 100 दिनों में उन्होंने कुल 492 झूठ या संदिग्ध दावे किए थे। इस निरंतर असत्य बोलने की आदत को देखते हुए अमेरिकी मीडिया ने "ट्रूथ-ओ मीटर" की शुरुआत की थी, ताकि ट्रंप के झूठ और गलत दावों की संख्या को ट्रैक किया जा सके।
अब, हम ट्रंप के पहले कार्यकाल के कुछ प्रमुख झूठों पर नजर डालते हैं, जो अक्सर सार्वजनिक बहस का हिस्सा रहे हैं:
बाइडेन के कार्यकाल में उच्च मुद्रास्फीति: ट्रंप ने शपथ ग्रहण के बाद बाइडेन सरकार पर हमला करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में महंगाई दर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है, और यह स्थिति अधिक खर्च और ऊर्जा की कीमतों के बढ़ने से हुई है। हालांकि, जब इस दावे की जांच की गई, तो पाया गया कि बाइडेन के कार्यकाल के पहले दो वर्षों में महंगाई दर केवल 9.1% (2022 में) तक पहुंची, जो कि 40 साल में सबसे अधिक थी। लेकिन, 2024 के अंत तक यह दर घटकर 2.9% पर आ गई। द गार्जियन ने उल्लेख किया है कि अमेरिका में सबसे अधिक महंगाई दर 1920 में 23.7% थी, जो ट्रंप के दावे से कहीं ज्यादा थी।
बाइडेन के कार्यकाल में उच्च मुद्रास्फीति: ट्रंप ने शपथ ग्रहण के बाद बाइडेन सरकार पर हमला करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में महंगाई दर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है, और यह स्थिति अधिक खर्च और ऊर्जा की कीमतों के बढ़ने से हुई है। हालांकि, जब इस दावे की जांच की गई, तो पाया गया कि बाइडेन के कार्यकाल के पहले दो वर्षों में महंगाई दर केवल 9.1% (2022 में) तक पहुंची, जो कि 40 साल में सबसे अधिक थी। लेकिन, 2024 के अंत तक यह दर घटकर 2.9% पर आ गई। द गार्जियन ने उल्लेख किया है कि अमेरिका में सबसे अधिक महंगाई दर 1920 में 23.7% थी, जो ट्रंप के दावे से कहीं ज्यादा थी।
ईवी जनादेश रद्द कर देंगे: ट्रंप ने दावा किया था कि उनकी सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के लिए अनिवार्यता के आदेश को रद्द कर देगी, जिससे ऑटो उद्योग को बचाया जा सकेगा। लेकिन जब इस दावे की जांच की गई, तो पाया गया कि ऐसा कोई आदेश पहले से अस्तित्व में नहीं था, जिसका मतलब है कि यह दावा पूरी तरह से गलत था। यह उदाहरण ट्रंप के झूठ बोलने के तरीके को स्पष्ट करता है, जो मुद्दों को उलझाने और भ्रम पैदा करने के लिए करते हैं।
जन्मसिद्ध नागरिकता अधिकार वाला अकेला देश अमेरिका: ट्रंप ने एक बार यह दावा किया था कि अमेरिका दुनिया का इकलौता देश है, जो जन्म से नागरिकता प्रदान करता है। हालांकि, इस दावे को कई मीडिया आउटलेट्स ने नकारते हुए कहा कि दुनिया के करीब तीन दर्जन देशों में यह प्रथा है, जिनमें अमेरिका के पड़ोसी देशों कनाडा और मैक्सिको समेत अधिकांश दक्षिण अमेरिकी देश भी शामिल हैं। ट्रंप का यह दावा पूरी तरह से तथ्यहीन था, और यह इस तथ्य को उजागर करता है कि उनके बयानों में कई बार सच्चाई की कमी होती है।
चीन पर ट्रंप टैरिफ: ट्रंप ने यह दावा किया कि उनके पहले कार्यकाल में अमेरिका ने चीन पर भारी टैरिफ बढ़ाकर सैकड़ों अरब डॉलर वसूले हैं। हालांकि, CNN ने इसे खारिज किया और बताया कि यह टैरिफ चीन से नहीं बल्कि अमेरिकी आयातकों से लिया गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इन टैरिफ का सबसे ज्यादा असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ा था, न कि चीन पर। यह उदाहरण भी दर्शाता है कि ट्रंप के कई आर्थिक दावे गलत थे और उन्होंने सिर्फ राजनीतिक लाभ लेने के लिए गलत जानकारी दी।
इन झूठों के अलावा, ट्रंप के कार्यकाल में कई अन्य भ्रामक और विवादास्पद बयान सामने आए थे, जो उनके नेतृत्व की आलोचना का कारण बने थे। यह उनके पहले कार्यकाल में मीडिया द्वारा जारी किए गए "ट्रूथ-ओ मीटर" के आंकड़ों को प्रमाणित करते हैं, जो लगातार ट्रंप के झूठों को ट्रैक करते रहे।
इसके बावजूद, ट्रंप के पुनः राष्ट्रपति बनने के बाद भी यह सवाल उठता है कि क्या वह अपनी आदतों को बदलेंगे या फिर नए कार्यकाल में भी अपने झूठ बोलने के क्रम को जारी रखेंगे। उनके बयानों का प्रभाव और सच्चाई की जांच मीडिया द्वारा निरंतर की जा रही है, और यह देखना होगा कि वह इस बार कितनी बार असत्य बोलते हैं।
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