अजित पवार की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "जब 2008 में आतंकी हमला हुआ था, मैं उसी शहर में था। हम हमलों की जगहों पर गए थे, और वह मंजर बेहद भयावह था। उस वक्त यह जानना जरूरी था कि हमलों के पीछे मास्टरमाइंड कौन था।"
उन्होंने आगे कहा, "अब जब तहव्वुर राणा भारत आ चुका है, उससे पूछताछ के बाद यह स्पष्ट होगा कि उसे इस हमले को अंजाम देने के लिए किसने निर्देश दिए थे और इसके पीछे की मंशा क्या थी। इन बातों के सामने आने के बाद ही हम यह तय करेंगे कि आगे की रणनीति क्या होनी चाहिए, ताकि नागरिक ज्यादा सुरक्षित और आश्वस्त महसूस करें।"
पूर्व गृहमंत्री और कांग्रेस नेता सुशील कुमार शिंदे ने कहा, "यह सरकार की एक प्रक्रिया है जो जारी है। हम लोगों ने ही अजमल कसाब और अफजल गुरु को फांसी दिलवाई थी। अब देखना यह है कि सुप्रीम कोर्ट और एनआईए इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं।"
कैसे जुड़ा था तहव्वुर राणा 26/11 हमलों से?
एनआईए के अनुसार, तहव्वुर राणा 26/11 हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक डेविड कोलमैन हेडली का करीबी था। राणा ही हेडली के भारत आने-जाने की व्यवस्था करता था और उसे संभावित टारगेट की रेकी करने में मदद करता था।
बताया जा रहा है कि मुंबई के चबाड हाउस, नेशनल डिफेंस कॉलेज और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में हमलों की योजना में राणा की अहम भूमिका रही थी। एनआईए का कहना है कि वह अपने इमिग्रेशन बिजनेस की आड़ में भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता था। राणा का मकसद भारत में आतंक और भय का माहौल बनाना था।





