Molitics Logo
होम भारत में गंभीर हुई कुपोषण की समस्या, यूपी और एमपी टॉप पर - मंत्रालय

भारत में गंभीर हुई कुपोषण की समस्या, यूपी और एमपी टॉप पर - मंत्रालय

उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 46.36 फ़ीसदी बच्चे बौनेपन का शिकार हैं, और कम वज़न के मामले में 26.21 फ़ीसदी के साथ मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर है।

भारत में गंभीर हुई कुपोषण की समस्या, यूपी और एमपी टॉप पर - मंत्रालय
फोटो: भारत में गंभीर हुई कुपोषण की समस्या, यूपी और एमपी टॉप पर - मंत्रालय
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 26 जुलाई को संसद में बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी एक चौंकाने वाली जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार, भारत गंभीर कुपोषण की समस्या से जूझ रहा है। आंकड़े बताते हैं कि देश में कुल पाँच वर्ष तक के बच्चों में से 36 फ़ीसदी बच्चे ऐसे हैं जो बौनेपन का शिकार हैं। 6 फ़ीसदी बच्चे शारीरिक रूप से बहुत कमज़ोर हैं, और 17 फ़ीसदी बच्चे ऐसे हैं जिनका वज़न तय मानकों के हिसाब से बहुत कम है। सभी राज्यों के आंकड़ों को देखें तो उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 46.36 फ़ीसदी बच्चे बौनेपन का शिकार हैं, और कम वज़न के मामले में 26.21 फ़ीसदी के साथ मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि केंद्र की वे नीतियाँ जिसमें देश से कुपोषण की समस्या को ख़त्म करना है, इस मामले में सरकार पूरी तरह से नाकाम होती हुई नज़र आ रही है।

सोशल और डिजिटल मीडिया अध्यक्ष और कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुपोषित बच्चों को पोषित किये बिना कोई देश विश्व गुरु नहीं बन सकता है, और फ़र्ज़ी जुमलों, ज़ुबानी जमा खर्च यानी सिर्फ कहने भर से यह बच्चे पोषित नहीं होंगे। वहीं दिल्ली बीजेपी के सह-मीडिया संयोजक ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुपोषण पर कांग्रेस बोलती हुई अच्छी नहीं लगती, जबकि कांग्रेस ने केंद्र सरकार में 55 साल बिताये है।

रिपोर्ट के मायने

बच्चों में कम वज़न साफ़ संकेत दे रहा है कि 17 फ़ीसदी बच्चों को उनके विकास के लिए जरूरी पोषण नहीं मिल रहा है। जिसकी वज़ह से बच्चों में लंबी बीमारियों की समस्या बने रहने की संभावना बनी रहती है। कई मानक रिपोर्ट्स के अनुसार, 5 साल तक के बच्चे के लिए 1000 से 1400 कैलोरी तक का पोषण हर दिन जरूरी है, यानी भारत में कई बच्चे ऐसे हैं जिन्हें 1000 कैलोरी तक का पोषक भोजन भी नहीं मिल पा रहा है।

भारत में 36 फ़ीसदी बच्चों के बौनेपन का शिकारी होने का मतलब है कि ऐसे बच्चे लंबे समय से जरूरी पोषण के बिना रह रहे हैं, जिसका परिणाम यह है कि ऐसे बच्चों का विकास रुक जाता है। बौनापन न केवल शारीरिक विकास को प्रभावित करता है, बल्कि बच्चे के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के विकास पर भी गंभीर प्रभाव डालता है। अगर बच्चों में बौनापन है तो इसका एक अर्थ यह भी है कि माता को गर्भावस्था के दौरान बेहतर पोषण नहीं मिला है, अगर गर्भवती माताओं को आवश्यक पोषण उपलब्ध नहीं कराया गया तो इसके और भी गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

बच्चों में कुपोषण की समस्या यह भी इशारा करती है कि 6 फ़ीसदी बच्चों को आज भी उतना भोजन नहीं मिल पा रहा है, जिस से उनके दैनिक पोषण की आवश्यकता पूरी हो सके। कुपोषण के शिकार वाले बच्चों का मृत्यु दर भी अधिक होता है, यानी ऐसे बच्चों की मृत्यु का खतरा बना रहता है।

राज्यों के अनुसार आंकड़े

उत्तर प्रदेश के बाद लक्षद्वीप में 46.31 फ़ीसदी बच्चें बौनेपन का शिकार है। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में भी क्रमशः 44.59% और 41.61% बौनेपन की दर चिंताजनक है। कुपोषण के मामले में लक्षद्वीप में सबसे गंभीर स्थिति है, जहाँ 13.22% बच्चे इससे प्रभावित हैं। बिहार और गुजरात में भी क्रमशः 9.81% और 9.16% की उच्च वेस्टिंग यानी कुपोषण की दर है। कम वजन वाले बच्चों के मामले में मध्य प्रदेश के बाद दादरा और नागर-हवेली तथा दमन और दीव में 26.41 फ़ीसदी और लक्षद्वीप में 23.25 फ़ीसदी की दर है, जोकि बहुत चिंताजनक है। हालाँकि, कुछ राज्यों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। गोवा में 5.84 फ़ीसदी के साथ सबसे कम बौनेपन की दर है। वहीं कमज़ोरी की दर 0.85 फ़ीसदी और कम वज़न वाले बच्चों की दर 2.18 फ़ीसदी है। सिक्किम और लद्दाख में भी कुपोषण की दर तुलनात्मक रूप से कम है, जो ज़्यादा प्रभावी पोषण नीतियों या बेहतर समग्र स्वास्थ्य स्थितियों की तरफ़ इशारा करती है।