साजिश का खुलासा
तमिलनाडु की राजनीतिक परिदृश्य में एक गंभीर घटना घटित हुई है, जहां मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) सरकार को गिराने के लिए एक व्यापक साजिश की योजना बनाई जा रही है। इस साजिश का नाम 'प्रोजेक्ट मेघालय' रखा गया है। रिपोर्टों के अनुसार, चेन्नई पुलिस को इस मामले में महत्वपूर्ण सबूत मिले हैं और वे वर्तमान में जांच कर रहे हैं।
एक क्षेत्रीय समाचार चैनल 'पुथिया थलैमुरई' के वरिष्ठ पत्रकार विजयन को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उन्हें 15 और 16 जुलाई को कड़ी पूछताछ की गई और उनका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया है, जिसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
विधायक की शिकायत
यह मामला टीवीके के विधायक एन. इलैयाराजा की शिकायत के बाद प्रकाश में आया। विधायक ने जून के अंत में आरोप लगाया था कि मुख्य आरोपी थिरुनावुक्कारासु और उसके सहयोगियों ने उन्हें विधानसभा में पार्टी के खिलाफ मतदान करने के लिए 35 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की थी। जब विधायक ने इस ऑफर को ठुकराया, तब उन्हें और उनके परिवार को धमकाने की कोशिश की गई।
पुलिस की जांच के अनुसार, इस साजिश में टीवीके के लगभग 15 विधायकों को पैसे का लालच देकर पार्टी के व्हिप के खिलाफ मतदान के लिए राजी करने की योजना थी। इस संदर्भ में कुछ डीएमके नेताओं के नाम भी सामने आए हैं, हालांकि डीएमके ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया है।
यूट्यूबर का संबंध
पुलिस के मुताबिक, इस साजिश का एक प्रमुख आरोपी थिरुनावुक्कारासु नामक यूट्यूबर है, जो 'IPDS' नाम से यूट्यूब पर एक ओपिनियन पोलिंग ग्रुप संचालित करता है। थिरुनावुक्कारासु और पत्रकार विजयन के बीच बातचीत के साक्ष्य भी पुलिस को मिले हैं। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या पत्रकार भी इस साजिश में शामिल थी।
इस मामले में अब तक पुलिस ने 9 लोगों को गिरफ्तार किया है और जांच की सूक्ष्मता बड़े राजनीतिक चेहरों तक पहुंच चुकी है। पुलिस ने डीएमके के पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक को भी पूछताछ के लिए समन जारी किया है।
डीएमके की प्रतिक्रिया
इस बीच, पत्रकार विजयन से पूछताछ और उनके मोबाइल फोन की जब्ती के बाद डीएमके ने विजय सरकार की आलोचना की है। चेन्नई प्रेस क्लब और डीएमके सांसद कनिमोझी ने इस कार्रवाई की निंदा की है। कनिमोझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'जांच के बहाने पत्रकार विजयन का मोबाइल फोन जब्त करना और उन्हें हिरासत में लेना टीवीके सरकार की पुलिस फोर्स का निंदनीय कार्य है।'
उन्होंने इसे पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर एक हमला करार दिया और मांग की कि पत्रकार को तुरंत रिहा किया जाए। साथ ही, उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि वह जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर राजनीतिक विरोधियों को डराने का प्रयास न करे। चेन्नई प्रेस क्लब ने भी आरोप लगाया कि बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए पत्रकार से पूछताछ की गई।
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