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शशि थरूर ने सीजेपी की सराहना की, विपक्ष को दी सलाह

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए इसे युवाओं की आवाज बताया है। उन्होंने विपक्षी पार्टियों को नसीहत दी कि उन्हें युवाओं की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

शशि थरूर ने सीजेपी की सराहना की, विपक्ष को दी सलाह
फोटो: शशि थरूर ने सीजेपी की सराहना की, विपक्ष को दी सलाह

सीजेपी का बढ़ता प्रभाव

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), जिसने नीट (NEET) पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन करके अपनी पहचान बनाई, अब तेजी से अपने समर्थकों की संख्या बढ़ा रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भी इस पार्टी की प्रशंसा की है। उन्होंने 'इंडियन एक्सप्रेस' में प्रकाशित एक लेख में सीजेपी को युवाओं की आवाज बताते हुए विपक्ष को सलाह दी है।


थरूर ने बांकीपुर और दतिया उपचुनाव के परिणामों और देशभर में युवाओं के बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में कहा कि इन घटनाओं ने भारतीय राजनीति की दिशा में एक नया संकेत दिया है। सत्ताधारी दल, जिसे पहले अजेय माना जाता था, अब हिंदी भाषी राज्यों में अपनी चुनावी रणनीति को पुनर्मूल्यांकन करने के लिए बाध्य है।


एक तंज से उपजा आंदोलन

थरूर ने बताया कि CJP का यह आंदोलन किसी जातिगत समीकरण या चुनावी रणनीति का परिणाम नहीं है। दरअसल, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने बेरोजगारी के खिलाफ आवाज उठाने वाले युवाओं की तुलना परजीवियों से की, तो इस पर युवाओं का आक्रोश फट पड़ा।


इस टिप्पणी को युवाओं ने प्रतीकात्मक रूप से अपनाया और 'कॉकरोच जनता पार्टी' नामक एक व्यंग्यात्मक डिजिटल अभियान शुरू किया। यह अभियान तेजी से एक विशाल राष्ट्रीय आंदोलन में परिवर्तित हो गया, जिसने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने, और नौकरियों की अनिश्चितता से पीड़ित युवाओं को एक मंच प्रदान किया।


राजनीति की सीमाएं और सीजेपी की सफलता

थरूर ने यह भी उल्लेख किया कि इस घटनाक्रम ने मुख्यधारा की विपक्षी पार्टियों की रणनीतिक सीमाओं को उजागर किया है। विपक्षी दल लंबे समय से जातिगत समीकरणों और संवैधानिक मुद्दों पर केंद्रित रहे हैं, लेकिन यह युवाओं की तत्काल समस्याओं को संबोधित नहीं कर पाए हैं।


सीजेपी की सफलता का एक मुख्य कारण इसकी सहजता और जमीनी जुड़ाव है। पारंपरिक राजनीतिक दलों द्वारा युवाओं के मुद्दे उठाना अक्सर राजनीतिक अवसरवाद के रूप में देखा जाता है, जबकि सीजेपी ने बिना किसी पार्टी ढांचे के पीड़ित युवाओं की सच्ची आवाज बनने में सफलता प्राप्त की है।


राजनीतिक दलों के लिए परिवर्तन की आवश्यकता

थरूर ने चेतावनी दी कि पारंपरिक राजनीतिक दलों की शीर्ष-से-नीचे की संरचना और वंशवाद की संस्कृति युवाओं के लिए प्रवेश में बाधक बनी हुई है। अधिकांश दलों में युवा कार्यकर्ताओं को केवल रैलियों में भीड़ जुटाने या वरिष्ठ नेताओं का प्रचार करने तक सीमित रखा जाता है।


यदि विपक्षी दल इस युवा असंतोष को स्थायी राजनीतिक विकल्प में बदलना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी कार्यशैली में व्यापक बदलाव लाना होगा। उन्हें बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले प्रतिभाशाली युवाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करना होगा।


युवाओं से संवाद का महत्व

शशि थरूर ने कहा कि पारंपरिक और पुराने भाषणों के बजाय युवाओं की भाषा में संवाद स्थापित करना आवश्यक है। राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे नेताओं द्वारा हाल ही में किए गए प्रयास इसी दिशा में सकारात्मक माने जा रहे हैं।


इस आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत की युवा आबादी राजनीति से बेखबर नहीं है, बल्कि वे अपनी बात कहने के लिए एक पारदर्शी और सम्मानजनक मंच की तलाश में हैं। यदि स्थापित दल समय रहते इस बदलाव को नहीं स्वीकार करते, तो वे देश की बदलती राजनीतिक चेतना से कट सकते हैं।